औरैया। विशेष न्यायाधीश ने एक छेड़छाड़ व एससी-एसटी एक्ट के आरोपी प्रांशू चौबे की जमानत मंजूर कर ली है। सदर कोतवाली क्षेत्र के चार साल पुराने मामले में कोर्ट ने सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया।
कोतवाली एक गांव निवासी महिला ने मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी कि पांच मई 2022 की रात वह अपनी दुकान बंद करके घर लौट रही थी, तब मोहल्ले के बनारसीदास निवासी प्रांशू चौबे और तीन अज्ञात व्यक्तियों ने उसका हाथ पकड़कर छेड़खानी की थी। विरोध करने पर घसीटने और बीच-बचाव करने आए उसके भाई के साथ मारपीट करने का आरोप था। इसके अलावा जातिसूचक गालियां देने और परिवार को धमकी देने का भी आरोप लगाया गया था। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच की थी। शनिवार को इस मामले की सुनवाई की गई।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश विकास गोस्वामी ने पाया कि मामला सात वर्ष से कम सजा का है। अभियोजन पक्ष की ओर से कोई आपराधिक इतिहास प्रस्तुत नहीं किया गया है। अदालत ने अभियुक्त को 25 हजार रुपये व्यक्तिगत बंधपत्र और इतनी ही राशि की एक जमानतगीर प्रस्तुत करने पर रिहा करने का आदेश दिया है।
अपहरण और धमकी में आरोपी की दूसरी जमानत अर्जी खारिज
औरैया। दिबियापुर थाना क्षेत्र के एक नाबालिग छात्रा के अपहरण, नशीला पदार्थ सुंघाने और धमकी देने के मामले में विशेष न्यायालय ने आरोपी चंदन की दूसरी जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी मां ने थाने में तहरीर दी थी कि उनकी 12 वर्षीय पुत्री कक्षा-8 की छात्रा है, एक जून 2026 की रात को घर की छत से लापता हो गई। आरोप था कि आरोपी चंदन उसे ले गया था और अर्धबेहोशी की हालत में कंचौसी मुक्तिधाम के पास नहर पटरी पर छोड़ गया था। इस मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच की। शनिवार को मामले की सुनवाई की गई। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश विकास गोस्वामी की अदालत ने आरोपी का दूसरे जमानत प्रार्थना पत्र पर्याप्त आधार न होने के कारण निरस्त कर दिया।(संवाद)
ससुर की अग्रिम जमानत याचिका खारिज
औरैया। एक विवाहिता नंदिनी की संदिग्ध हालात में मौत के मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने आरोपी ससुर मोतीलाल की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया। वादी निखिल कुमार ने पुलिस को बताया कि उन्होंने अपनी बहन की शादी करीब चार साल पहले गांव राहतपुर निवासी रिंकू सिंह के साथ की थी। शनिवार को मामले में कोर्ट ने सुनवाई की। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद सत्र न्यायाधीश मयंक चौहान ने तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने मोतीलाल को अग्रिम जमानत देने से इन्कार करते हुए उनका प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया। (संवाद)