फोटो-18एयूआरपी-01- संचालन के इंतजार में बन कर खड़ी बर्न यूनिट। संवाद
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औरैया। सात साल पहले जिला अस्पताल में प्लास्टिक सर्जरी एवं बर्न यूनिट बनाई गई। इसमें लाखों रुपये के उपकरण भी लगा दिए गए, लेकिन डॉक्टरों और स्टॉफ की तैनाती आज तक नहीं की गई है। इस कारण आग से झुलसे मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। इनको कानपुर, लखनऊ, सैफई या आगरा रेफर कर दिया जाता है। कई बार तो मरीज वहां पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं।
100 शैया जिला अस्पताल में वर्ष 2015 में करीब एक करोड़ रुपये की लागत से वातानुकूलित प्लास्टिक सर्जरी एवं बर्न यूनिट की स्थापना की गई थी। तब उम्मीद जगी थी कि झुलसे मरीजों को यहीं इलाज मिल जाएगा। साथ ही सर्जरी भी आसानी से हो सकेगी, लेकिन डॉक्टरों और स्टाफ की तैनाती न होने से यूनिट चालू नहीं हो पाई।
यूनिट पर आज भी ताला लटक रहा है। इमारत की देखरेख ढंग से न होने से अंदर से बाहर तक धूल और गंदगी है। यूनिट की बाहरी फर्श जगह-जगह धंस गई है। कई खिड़कियों के कांच टूट गए हैं। कमरों के अंदर रखे उपकरण पड़े-पड़े खराब हो रहे हैं। यूनिट को कबूतरों ने अपना ठिकाना बना लिया है।
बर्न यूनिट के संचालन के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। शासन से डॉक्टरों और अन्य स्टाफ की मांग की गई है। जल्द ही डॉक्टरों की तैनाती की उम्मीद है। डाक्टरों की तैनाती के बाद संचालन शुरू करा दिया जाएगा। -डॉ. अर्चना श्रीवास्तव, सीएमओ।
फोटो18एयूआरपी 01- संचालन के इंतजार में प्लास्टिक एवं बर्न यूनिट की इमारत। संवाद- फोटो : AURAIYA