औरैया। बायोरेमेडिएशन (सूक्ष्य जीवों) और फाइटोरेमिडिएशन (पौधों) तकनीक से यमुना में गिर रहे सीवरेज पानी को शुद्ध करने के लिए 72 लाख की कार्य योजना एक माह पहले स्वीकृत हुई थी। इसके साथ ही 19 करोड़ रुपये से शहर की जलनिकासी समस्या दूर की जानी है। दोनों ही परियोजनाएं नगर पालिका अफसरों की अनदेखी के चलते अधर में लटकी हैं। इससे शहर से प्रतिदिन निकलने वाला 12.37 मिलियन लीटर दूषित पानी नालों के माध्यम से यमुना के पानी को प्रदूषित कर वातावरण दूषित कर रहा है। वहीं जल भराव की समस्या से लोगों को जूझना पड़ रहा है।
शहर की जनसंख्या 15.61 लाख अनुमानित है। यहां से प्रतिदिन निकलने वाला 12.37 मिलियन लीटर दूषित पानी सीवरेज नालों के माध्यम से यमुना नदी में गिर रहा है। इससे यमुना नदी का पानी प्रदूषित होने से जहरीला हो रहा है। साथ ही वातावरण भी प्रदूषित हो रहा है। इसे लेकर पालिका प्रशासन ने यमुना नदी में पहुंचने से पहले ही प्रदूषित पानी को बायोरेमेडिएशन (सूक्ष्य जीवों) और फाइटोरेमिडिएशन (पौधों) तकनीक से शुद्ध करने का 72 लाख रुपये का प्रस्ताव तैयार किया था।
जिस पर एक माह पूर्व जिलाधिकारी पीसी श्रीवास्तव ने स्वीकृति दे दी। अहम बात यह है कि इस प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने के बाद भी पालिका प्रशासन की ओर से अभी तक इसके निर्माण को लेकर टेंडर की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है। इससे यमुना नदी के पानी में प्रदूषित पानी लगातार गिर रहा है। बावजूद इसके पालिका प्रशासन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रही है।
वहीं, शहर की सबसे गंभीर जलभराव की समस्या के निदान को कार्यदायी संस्था जल निगम की ओर से सर्वे के उपरांत 19 करोड़ के बजट से बनाए जाने वाले नाले का प्रस्ताव लगभग दो माह पहले शासन को स्वीकृति के लिए भेज दिया था। बावजूद इसके आज तक स्वीकृति के इंतजार में लटका पड़ा है। बता दें कि बरसात के दिनों में शहर के लगभग आधा दर्जन मोहल्लों में जल भराव की गंभीर समस्या खड़ी हो जाती है।
तालाबों के भर जाने से नालों से पानी उफन कर घरों में भर जाता है। जिससे लोगों के सामने घरों से बाहर निकलने की भी गंभीर समस्या खड़ी हो जाती है। पिछले साल मोहल्ला बनारसीदास स्थित तालाब भारी बरसात के कारण भर गया था। जिससे उसका पानी नालों के माध्यम से मोहल्ले के कई घरों में भर गया था। तब लोगों को घरों के नीचे तल को छोड़कर दूसरी मंजिल पर शरण लेनी पड़ी थी।
इन मोहल्लों में होता है जल भराव---
बनारसीदास, नरायनपुर, इंदिरा नगर नई बस्ती, आर्य नगर, पढ़ीन दरवाजा नई बस्ती मुख्य मोहल्ले हैं। इसके अलावा बीच बस्ती में भी लोगों को जलभराव की समस्या झेलनी पड़ती है। ऐसे में नाला निर्माण ही स्थायी समाधान दिखाई दे रहा है।
शहर के इटावा रोड निवासी डॉ. जीएन अग्रवाल का कहना है कि शहर से निकलने वाला प्रदूषित पानी यमुना नदी के पानी में पहुंचकर उसे प्रदूषित कर रहा है। जबकि आस्था के चलते हिंदू धर्म के लोग अक्सर यमुना नदी में पहुंचकर उसके जल का आचमन करते हैं। ऐसे में यमुना के पानी में शामिल बैक्टीरिया लोगों के शरीर में पहुंचकर उन्हें नुकसान पहुंचा सकते हैं। पालिका प्रशासन को प्रस्ताव पर काम शुरू कराने में देर नहीं करनी चाहिए।
मोहल्ला बनारसीदास में रेडीमेड की दुकान किए व्यापारी नीरज पोरवाल बताते हैं कि शहर में जलभराव की समस्या का निदान होना बहुत ही जरूरी है। पिछले साल जलभराव से लोगों का लाखों रुपये का नुकसान हुआ था। मंजुल मयंक त्रिपाठी के घर पर पानी भर जाने से तलघर में रखा अनाज बर्बाद हो गया था। वहीं कंप्यूटर लैब में पानी भर जाने से लगभग चार लाख रुये के कंप्यूटर खराब हो गए थे। नगर पालिका को पहल कर जल्द नाला निर्माण कराना चाहिए।
अधिशासी अधिकारी राम आसरे कमल ने कहा कि तत्कालीन अधिशासी अधिकारी बलवीर सिंह ने 31 जुलाई को सेवानिवृत्त होने पर अपने डिजिटल हस्ताक्षर ऑनलाइन अपलोड नहीं कराए। जिससे टेंडर की प्रक्रिया में देरी हुई। एक अगस्त को उन्होंने चार्ज लेने के बाद अपने हस्ताक्षर ऑनलाइन अपलोड करा दिए हैं। इसी माह टेंडर की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। वहीं नाला का प्रस्ताव जल निगम के द्वारा शासन को भेजा गया है। उसका निर्माण जल निगम को कराना है। इसलिए इसमें वह कुछ भी बता पाने में असमर्थ हैं।-