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बिना बुलाए किसी के यहां निमंत्रण पर जाना अपमान का बनता है कारण

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औरैया। शहर के जेसीज चौराहे के पास चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन आचार्य सतीश अवस्थी ने कहा कि बिना बुलाए किसी के घर जाना अपमान का कारण बनता है। उन्होंने सती चरित्र का प्रसंग सुनाया। बताया कि भगवान शिव की बात को न मानते हुए माता सती अपने पिता के घर गई थीं।
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ध्रुव चरित्र की कथा में आचार्य सतीश अवस्थी ने समझाया कि ध्रुव की सौतेली मां सुरुचि के द्वारा अपमानित होने पर भी उनकी मां सुनीति ने धैर्य नहीं खोया। इससे एक बहुत बड़ा संकट टल गया। परिवार को बचाए रखने के लिए धैर्य संयम की नितांत आवश्यकता होती है।
आचार्य ने बताया कि भक्ति के लिए कोई उम्र बाधा नहीं बन सकती। बचपन में भक्ति की प्रेरणा देनी चाहिए, क्योंकि बचपन कच्चे मिट्टी की तरह होता है, उसे जैसा चाहें, वैसा बनाया जा सकता है। कहा कि प्रह्लाद को विश्वास था कि भगवान उसकी रक्षा करेंगे और ऐसा हुआ भी।
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