औरैया। बिजली आपूर्ति बेहतर करने के लिए भले ही सरकार ने करोड़ों खर्च कर दिए हो, लेकिन धरातल पर स्थिति अलग है। बांस और बल्ली के सहारे जर्जर लटकते मौत रूपी तार और खंभे लोगों की चिंता बढ़ा रहे हैं। जिम्मेदार जानते हुए भी अनजान बने हैं। घटनाओं के बाद भी अफसरों की आंखें नहीं खुल रही हैं।
करीब 17 लाख आबादी वाले जिले में 477 ग्राम पंचायतें और छह नगर निकाय हैं। जिले के आठ उपखंडों में 29 उपकेंद्र व 131 फीडरों के माध्यम से बिजली आपूर्ति की जाती है। पिछले एक दशक में बिजली सुधार के लिए राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना, पंडित दीनदयाल उपाध्याय योजना, प्रधानमंत्री सहज जन बिजली योजना के जरिए हर घर को रोशन करने और सुधार पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन शहर से लेकर ग्रामीणों इलाकों तक व्यवस्था न सुधरी। शहरी क्षेत्र में वर्षों पुराने झूलते बिजली तारों से आए दिन हादसे हो रहे हैं। वहीं बेला बर्रुकुलासर, कैथावा, बिधूना, दिबियापुर के ग्रामीण क्षेत्र के साथ बीहड़ के आयाना के में बांस-बल्लियों के सहारे आपूर्ति की जा रही है। इनमें कई इलाके ऐसे हैं जो नई बस्ती के रूप में बस रहे हैं।
अस्पताल के बाहर तीन बार हादसा
शहर के 50 शैया अस्पताल के पास से 11 हजार वोल्ट की एचटी लाइन गुजरी है। मार्च महीने से लेकर अब तक तीन बार हादसे हो चुके हैं। मार्च महीने में करंट दौड़ते जर्जर तार के टूट कर गिरने से तीन कार जल गई थी। इसके कुछ दिन बाद फिर से तेज हवा में तार टूटा जिससे एक गुमटी पर बैठा युवक घायल हो गया था। गुरुवार की दोपहर खंभे पर बंदर चढ़े तो तार टूट कर गिर गया। जिससे आग लग गई और दो बंदरों की करंट की चपेट में आने से मौत हो गई।
गार्डिंग न होने से रहता हादसे का डर
औरैया कस्बे के अलावा नगरीय निकाय क्षेत्रों में बिजली सुधार के इंतजाम का विभागीय अधिकारी ढिंढोरा पीट रहे हैं, लेकिन एचटी लाइनों में कई जगहों पर गार्डिंग होने व खुले में रखे ट्रांसफार्मरों में सुरक्षा जाली न लगाए जाने से हादसों का डर बना हुआ है।
शहरी बोले
शहर निवासी शिवम विश्नोई ने बताया कि बिजली विभाग से शहर के जर्जर तारों को लेकर कई बार बदलवाने की मांग की गई। इसके साथ ही जिन स्थानों पर गार्डिंग नहीं है उसकी भी मांग की जा चुकी है। सिर्फ आश्वासन मिल रहा है। शहर के व्यापारी सुधीर पुरवार ने बताया कि जर्जर तारों की वजह से कई बार हादसे हो चुके हैं। विभाग के लोग अनदेखी कर रहे है। गांव से लेकर नई बस्तियों में बिल वसूली पर ध्यान दिया जा रहा है, लेकिन बांस-बल्ली से हो रही आपूर्ति व जर्जर तार बदलने पर जोर नहीं दिया गया।
बोले जिम्मेदार
जिले में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर करने, जर्जर तार ठीक कराने, ट्रांसफार्मरों में सुरक्षा जाली आदि लगवाने के लिए पुर्नजीर्णोद्धार योजना के तहत नवंबर माह में प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। जैसे ही स्वीकृति मिलती है, काम शुरू कराया जाएगा।
-दिनेश कुमार दोहरे, अधीक्षण अभियंता विद्युत