कस्बे की आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने प्रदर्शन कर मानदेय की जगह वेतन की मांग की। मांगे पूरी न होने पर उन्होंने लखनऊ ओर दिल्ली में प्रदर्शन किए जाने का एलान किया है।
केंद्र और प्रदेश सरकार भले ही महिलाओं को पुरुषों के बराबर हक देने की बात कह रही हो, लेकिन आज भी महिलाओं को उचित स्थान नहीं मिला है। यह बात आंगनबाड़ी यूनियन अजीतमल की ब्लाक अध्यक्ष नलिनी पांडेय ने कही। उन्होंने मुरादगंज में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्ष 1973 में केंद्र सरकार ने आंगनबाड़ी विभाग को अलग कर दिया था।
इसमें ग्रामीणांचलों की विधवा, विकलांग व गरीब महिलाओं का उत्थान किया जा सके। इसके साथ ही मातृत्व का कल्याण, पल्स पोलियो टीकाकरण, परिवार नियोजन, जनगणना ड्यूटी व समय-समय पर सरकारी योजनाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक लाभ देने का था। इसके साथ ही तीन से छह वर्ष तक के बच्चों को खेल-खेल में शिक्षा देना आदि कार्यक्रम रहा है।
आंगनबाड़ी अपने दायित्वों का बखूबी निर्वाहन कर रहीं है, लेकिन उन्हे पैसा नहीं दिया जा रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने मांगे पूरी न होने पर लखनऊ व दिल्ली में प्रदर्शन किए जाने की घोषणा की है। इस मौके पर उमाकांती, ऊषा, मंजू, शैलेश कृष्णा, राजकुमारी समेत 25 आशाएं मौजूद रहीं।