फफूंद। इस्लामी नए साल की शुरुआत मोहर्रम के महीने से होती है। यह इस्लामी साल का पहला महीना होता है और यह महीना पैगंबर हजरत मुहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन और कर्बला की सरजमीन पर उनके 72 साथियों की शहादत की याद में मनाया जाता है।
इस महीने हजरत इमाम हुसैन के चाहने वाले प्रतिदिन जगह जगह लंगर व कुरानख्वानी कराकर इमाम हुसैन की याद मनाते हैं और सवाब हासिल करते हैं। वहीं मोहर्रम की सात तारीख को अलम का जुलूस तथा नौ व दस तारीख को हजरत इमाम हुसैन की याद में ताजिये भी निकाले जाते हैं। जिसको लेकर ताजियेदारों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। इमामबाड़ा में एक अजीब रौनक नजर आ रही है। जहां कारीगरों द्वारा ताजियों को सजाने संवारने के काम तेजी से चल रहा है और आगामी शुक्रवार 28 जुलाई मोहर्रम की नौ तारीख को रात 11 बजे से ताजियों का जुलूस निकलना प्रारंभ होगा जो शनिवार सुबह दस बजे अपने मुकाम पर वापस आकर समाप्त होगा। जबकि शनिवार 29 जुलाई दस मुहर्रम को देर शाम से ताजिये अपने मुकाम से उठ कर नगर के तयशुदा रास्तों से होते है दिबियापुर-फफूंद मार्ग पर पहुंचकर इकट्ठा होंगे जहां देर रात दो बजे कर्बला में जाकर सुपुर्द ए खाक होंगे।