कंचौसी (औरैया)। प्लास्टिक सिटी परियोजना में जमीन अधिग्रहण के मामले में नए सर्किल रेट से मुआवजा की मांग को लेकर किसानों ने सोमवार को किसान संघर्ष समिति के बैनरतले परियोजना परिसर के पास विरोध प्रदर्शन किया। किसानों का कहना है कि इस मसले को लेकर अब बड़े पैमाने पर आंदोलन छेड़ा जाएगा।
प्लास्टिक सिटी परियोजना अधिगृहीत जमीन के मुआवजे का पेंच फंसने से करीब डेढ़ दशक से अधर में लटकी है। किसानों का आरोप है कि यूपीएसआईडीसी जमीन अधिग्रहण करने के बाद उनको मांग के अनुरूप मुआवजा नहीं दे रही है। सोमवार को किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष ओंकार सिंह राजपूत की अगुवाई में प्रभावित किसानों ने परियोजना परिसर के पास पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया।
इस दौरान किसानों ने कहा है कि यूपीएसआईडीसी ने वर्ष 2003 में किसानों से भूमि का बैनामा कराया था, लेकिन जब उचित मुआवजा मांगा गया तो कार्यदायी संस्था ने उन्हें पुराने रेट से मुआवजा दिया। जबकि किसानों की नए सर्किल रेट से मुआवजा और नौकरी की मांग की थी।
संघर्ष समिति के ओंकार सिंह राजपूत ने बताया कि प्लास्टिक सिटी परियोजना में 341 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया है। इसमें लखनपुर, उसरारी, करोड़े पुरवा, लुखड़पुरा, हंसेपुर्वा, चमरौआ, प्रतापपुर, सुजानपुर सहित आठ गांवों के किसानों की जमीनें हैं, जिसमें 618 किसान प्रभावित हुए थे। 118 किसान न्यायालय चले गए। उनका आरोप है कि यूपीएसआईडीसी ने छल कर कुछ किसानों को अधिक रेट 44 हजार तो कुछ किसानों को 65 हजार तथा समझौते के बाद 1.25 लाख रुपये के हिसाब से भुगतान किया। विशेष सिफारिश पर कुछ किसानों को 1.65 लाख रुपये के हिसाब से भुगतान किया गया।
किसानों का कहना है कि परियोजना के लिए खरीदी गई भूमि पर प्रॉपर्टी डीलर का कार्य किया गया है। केवल 218 किसानों का भुगतान किया गया। लेकिन मांग के अनुसार सर्किल रेट से चार गुना भुगतान नहीं किया गया। इस परियोजना के अंतर्गत 90 किसान भूमिहीन हो गए। 110 किसान दुनिया छोड़कर चले गए।
किसानों का यह भी कहना है कि जमीन का अधिग्रहण बिना उनकी अनुमति से किया गया। इनमें से 20 किसान ऐसे हैं जिनको अभी तक मुआवजा नहीं दिया गया। प्रदर्शन के दौरान वीरेंद्र सिंह राजपूत, शोभा सिंह, सुघर सिंह, प्रेमदास, महेंद्र सिंह कमल, रामौतार सिंह, जिलेदार कुशवाह, नरेश राजपूत, मोहर सिंह, नाथूराम, रामरतन, जयराम, लाखन सिंह, ज्ञान सिंह, करन सिंह, मुरली व सुनील आदि मौजूद रहे।