बैंक ऑफ बड़ौदा में कैश जमा करने के लिए लाइन मेें लगे लोग।
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रिजर्व बैंक की ओर से जारी अधिसूचना और वित्त मंत्री अरुण जेटली के नोटबंदी को लेकर दिए बयान से जिले की बैंकों में असमंजस है। इससे बैंक अधिकारियों और खाताधारकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बुधवार को बैंकों में कड़ी पूछताछ के बाद पांच हजार से अधिक रुपये जमा किए गए। पूछताछ से बचने के लिए कई लोग रुपये जमा किए बिना बैरंग हो गए।
नोटबंदी को लेकर मंगलवार को नई अधिसूचना जारी हुई। इसके तहत सिर्फ एक बार ही खाते में 5000 से अधिक रुपये जमा किए जा सकते हैं। इसी को लेकर वित्त मंत्री अरुण जेटली का बयान था कि पहली बार पुराने नोट जमा करने वालों से पूछताछ नहीं होगी। दूसरी ओर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की अधिसूचना के तहत पुराने नोट जमा करने वाला सिर्फ एक बार रुपये जमा कर सकता है। जमाकर्ता को रुपये रखे होने का कारण बताने के साथ ही फार्म भी भरना होगा। दोनों बयानों में विरोधाभास से बैंक अधिकारी दो दिन परेशान रहे। पूछताछ से बैंक कर्मियों और खाताधारकों में बहस भी हुई।
यह बनाए बहाने
रुपये जमा करने वालों ने बैंक में अधिक भीड़ होने, अलमारी में रुपये दबे होने, लॉकर में रुपये पड़े रहने, उधारी का रुपया आने, शादी में रुपये बच जाने आदि के बहाने बनाए। इन बहानों को रुपया जमा करने वालों को फार्म में लिखना पड़ा। इसके बाद रुपये जमा हुए।
नेबिलगंज स्थित पंजाब नेशनल बैंक में कैश जमा करने वालों की संख्या कम देखने को मिली। शाखा प्रबंधक निशाद खान ने बताया कि 4000 से कम रुपये जमा करने वालों से पूछताछ नहीं की गई। आरबीआई के नियमों के तहत पांच हजार से अधिक रुपया जमा करने वालों से पूछताछ की गई। इसकी फीडिंग भी की जा रही है। अधिकांश लोगों ने रुपये अलमारी में रखे रहने व भीड़ अधिक होने की बात कही है।
आईडीबीआई बैक में रुपये निकालने व जमा करने वालों की भीड़ न के बराबर थी। इससे दोनाें काम एक ही काउंटर पर हुए। 5000 से कम रुपये जमा करने वाले युवक से पूछताछ नहीं की गई। शाखा प्रबंधक रुचिर कृष्ण कुशवाहा ने बताया कि बुधवार को लगभग छह लाख रुपये पांच हजार से अधिक के पुराने नोटों में कई खाताधारकों ने जमा किए। सबसे ज्यादा लोगों ने बैंक में उमड़ने वाली भीड़ का हवाला दिया। कुछ लोगों ने बीमार होने की बात कही है। सभी के रुपये खाते में जमा किए गए।