औरैया। खरीफ वर्ष 2023 समाप्ति की ओर है। एक अक्तूबर से रबी 2023-24 का अभियान शुरू होने जा रहा है। जिसको लेकर कृषि विभाग तैयारियों में जुटा है। जिला कृषि अधिकारी ने किसानों को फसलों में संतुलित मात्रा में उर्वरक प्रयोग करने की सलाह दी है। कहा कि किसान जैविक एवं प्राकृतिक खेती कर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। उन्होंने किसानों को वैकल्पिक उर्वरकों का प्रयोग करने का भी सुझाव दिया है।
रबी सीजन में किसान प्रमुख रूप से राई, सरसों, आलू, लहसुन व सब्जियों की बोआई के लिए खेतों को तैयार करने में जुटे हैं। जिले में वर्ष 2023-24 में उर्वरक खपत का लक्ष्य एक लाख एक हजार 104 मीट्रिक टन है। जिसमें यूरिया 67053 मीट्रिक टन, डीएपी 30785 मीट्रिक टन, एनपीके 1202 मीट्रिक टन, एमओपी 2064 मीट्रिक टन है।
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कृषि विभाग के पास मौजूदा समय में यूरिया 10804 मीट्रिक टन, डीएपी 7974 मीट्रिक टन, एनपीके 379 मीट्रिक टन, एमओपी 888 मीट्रिक टन तथा एसएसपी 667 मीट्रिक टन उपलब्ध है। सहकारी समितियों व निजी विक्रेताओं के यहां पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध है। जिला कृषि अधिकारी शैलेंद्र कुमार वर्मा ने कहा कि किसान फसलों में संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करें। उर्वरकों का अनावश्यक भंडारण न करें। जिससे सभी किसानों को सहूलियत मिल सके।
जिला कृषि अधिकारी ने कहा कि किसान रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने व फसलों में वैकल्पिक उर्वरकों की प्रयोग को बढ़ाने का प्रयास करें। उन्होंने किसानों को जैविक और प्राकृतिक खेती को अपनाने की भी सलाह दी। जिससे पर्यावरण एवं मृदा की गुणवत्ता बनी रहे।