एरवाकटरा ब्लाक क्षेत्र के सेंट्रल बैंक शाखा के सेवा केंद्र उमरेड़ी में खाताधारकों के साथ धोखाधड़ी करने वाले संचालक ने शुक्रवार को अग्रणी जिला प्रबंधक के आगे सरेंडर कर दिया। संचालक ने खाताधारकों की मदद से सरकारी धन का दुरुपयोग करने की बात स्वीकार कर ली। उसने एलडीएम को हस्ताक्षरयुक्त लिखित इकरारनामा सौंपा है।
बीते 12 अप्रैल को सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की एरवाकटरा शाखा की ओर से सेवा केंद्र उमरेड़ी से पिछले दिनों खातेदारों को गुमराह कर उनके खातों से 5.40 लाख रुपये की धनराशि निकाले जाने के मामले का खुलासा हुआ था। मामले में अग्रणी जिला प्रबंधक की ओर से उक्त सेवा केंद्र बंद करा देने के बाद उच्च स्तरीय जांच कराए जाने की सिफारिश की गई थी। प्रथम चरण की जांच रिपोर्ट में अग्रणी जिला प्रबंधक दूधनाथ ने उक्त धनराशि पेंशन अथवा छात्रवृत्ति योजना के होने पर शक जाहिर किया था। बिना खातेदारों को सूचना दिए सरकारी विभाग की ओर से खाते में भेजी गई 6000, 4500 व 1500 रुपये की धनराशि निकाले जाने का प्रत्यक्ष आरोप उक्त बैंक सेवा केंद्र संचालक सतीश चंद्र दीक्षित व उसका एक सहयोगी मोहित को माना जा रहा था।
गत 26 अप्रैल को उक्त सेवा केंद्र के संचालक ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को स्वीकार कर लिया। उसने अग्रणी जिला प्रबंधक को लिखित इकरारनामा दिया है। इकरारनामे में सेवा केंद्र संचालक सतीश ने केंद्र पर संचालित खातों से संबंधित खातेदारों के सहयोग से धनराशि निकाले जाने की बात कही है। सेवा केंद्र संचालक के इकरार के बाद सीडीओ की ओर से गठित तीनों जांच टीमों के लिए जांच काम अब आसान दिखने लगा है।
सेवा केंद्र उमरेड़ी के संचालक ने लिखित इकरारनामा प्रस्तुत किया है। इकरारनामे में संचालक ने खातेदारों के सहयोग से खातेदारों के खातों से पैसा निकाला जाना स्वीकार किया है। मामले में संचालक के इकरार के कार्रवाई आगे बढ़ा दी गई है।
दूधनाथ, अग्रणी जिला प्रबंधक
32 खातेदारों को लौटाई 1.77 लाख धनराशि
औरैया। बैंक सेवा केंद्र उमरेड़ी के खातेदारों के खातों से रकम निकालने का इकरार करने के बाद एलडीएम दूधनाथ की ओर से बनाया गया दबाव रंग लाया है। एलडीएम के दवाब में संचालक ने बैंक सेवा केंद्र से जुड़ी रेशमा बानो, आशमा बानो, आशा बेगम, अबरार हुसैन, असलम खां, विक्की खां, गुलफंसा बानो, मो. अनीश, मो. शकील, अवधेश कुमार, सतीश चंद्र, विकास आदि 32 खातेदारों के खातों से निकाली गई 1.77 लाख रुपये की धनराशि वापस उनके खातों में जमा करा दी गई है। मामले में लिखित इकरारनामे के बाद संचालक के खिलाफ कार्रवाई तय नहीं की गई है।