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Auraiya News: पॉक्सो के मामले में साक्ष्य के अभाव में आरोपी बरी

Sun, 05 Jul 2026 11:54 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
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औरैया। अजीतमल थाना क्षेत्र के पॉक्सो एक्ट के एक मामले में विशेष न्यायाधीश ने फैसला सुनाते हुए आरोपी को दोषमुक्त कर दिया है। अदालत ने मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों को संदेहपूर्ण और अपूर्ण मानते हुए यह फैसला सुनाया।
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वादिनी ने अजीतमल थाने में तहरीर दी थी कि कोई उसकी पुत्री को ले गया है। मां ने शुरू में कुछ अन्य लोगों पर शक जाहिर किया था लेकिन विवेचना के दौरान पुलिस ने सदाशिव निवासी नेवलपुर इटावा के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान स्थिति तब बदल गई जब मुख्य गवाहों ने अभियोजन की कहानी का समर्थन करने से इन्कार कर दिया।
अदालत में पीड़िता ने अपने बयानों में आरोपी सदाशिव की संलिप्तता से साफ इन्कार कर दिया। उसने कहा कि वह अपनी मर्जी से अपने मामा के घर गई थी और आरोपी ने उसके साथ कोई गलत कृत्य नहीं किया है। इसके चलते उसे पक्षद्रोही घोषित किया गया। पीड़िता की मां ने भी अपनी गवाही में स्पष्ट किया कि उसने केवल शक के आधार पर तहरीर दी थी और वह घटना की प्रत्यक्षदर्शी नहीं है।
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विशेष न्यायाधीश अखिलेश्वर प्रसाद मिश्र ने पत्रावली और साक्ष्यों का विश्लेषण किया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष घटना के आधारभूत तथ्यों को साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है। न्यायाधीश ने टिप्पणी की है कि प्रस्तुत साक्ष्य भ्रामक और विरोधाभासी हैं इसलिए आरोपी सदाशिव को आरोपों से दोषमुक्त किया जाता है। अदालत ने आरोपी के जमानत मुचलके और बंधपत्रों को भी निरस्त कर दिया है।
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एनडीपीएस मामले में गवाही के लिए सिपाही तलब

औरैया। विशेष सत्र न्यायालय एनडीपीएस एक्ट में एक मामले में शनिवार को सुनवाई हुई। कोर्ट ने निर्णय के लिए एक सिपाही को तलब किया है।
सदर कोतवाली के साल 2013 के एक मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायालय एनडीपीएस एक्ट चल रही है। अभियोजन पक्ष ने कोर्ट को बताया कि मामले से जुड़े माल का परीक्षण विधि विज्ञान प्रयोगशाला, लखनऊ में आरक्षी सत्येन्द्र सिंह की ओर कराया गया था। न्यायाधीश पारुल जैन ने माना कि निष्पक्ष निर्णय के लिए इस साक्षी का बयान अनिवार्य है।
न्यायालय ने अभियोजन के प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए आरक्षी सत्येन्द्र सिंह को समन जारी करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि साक्षी के आने पर उसी दिन साक्ष्य की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। मामले में अगली सुनवाई 10 जुलाई 2026 को नियत की गई है। (संवाद)

एससी-एसटी मामले में साक्ष्य न मिलने पर दो आरोपी दोषमुक्त

औरैया। विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट के न्यायालय ने मारपीट और जातिसूचक शब्द बोलने के मामले में दो आरोपियों मोनू और भोलू को दोषमुक्त कर दिया है।
न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष अपने आरोपों को साबित करने में पूरी तरह विफल रहा। कोर्ट ने कहा-वादी को एससी-एसटी मुआवजे की राशि मिली हो तो उसे वसूला जाए। कोर्ट ने वादी के खिलाफ झूठी गवाही का मुकदमा चलाने के आदेश भी दिए हैं।
फफूंद थाना क्षेत्र के रहने वाले सोनू धोबी ने वर्ष 2019 में मोनू उर्फ अभय अग्निहोत्री और भोलू उर्फ अमित अग्निहोत्री के खिलाफ तहरीर दी थी। आरोप था कि छह अगस्त 2019 की शाम को आरोपियों ने उसे और उसकी पत्नी को जातिसूचक गालियां दीं। मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था।

सुनवाई के दौरान वादी सोनू और उसकी पत्नी अर्चना सहित अन्य गवाह अपने बयानों से मुकर गए। वादी ने न्यायालय को बताया कि अज्ञात लोगों ने वारदात की थी। गवाहों के पक्षद्रोही होने और ठोस सबूतों के अभाव में न्यायालय ने दोनों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।
न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि वादी झूठ बोला है, इससे वह अब कानूनी कार्रवाई के दायरे में है। न्यायाधीश विकास गोस्वामी ने वादी सोनू धोबी के विरुद्ध अलग से वाद दर्ज कर नोटिस जारी किए जाने के निर्देश दिए। डीएम को निर्देशित किया गया है कि यदि वादी को एससी-एसटी एक्ट के तहत कोई मुआवजा राशि दी गई है तो उसे से वसूला जाए और अनुपालन रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत की जाए। (संवाद)
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