50 दिन की नोटबंदी से जिले की जनता नोटों को लेकर बैंकों की ओर दौड़ती रही है तो इन दिनों बैंकों में लंबी-लंबी लाइनें ही देखने को मिलीं। जिसके चलते इन 50 दिनों में खुलीं बैंकों में 565 करोड़ रुपया जमा कराया गया। जबकि इसके सापेक्ष बैंकों ने खाता धारकों को मात्र 147 करोड़ रुपया ही भुगतान किया है। खातेधारकों को कम भुगतान का कारण बैंकों को उनके करेंसी चेस्ट से रुपया न मिलना बताया जा रहा है।
जिले भर में 19 बैंकों की 109 शाखाएं हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर की शाम 500 और 1000 के नोट को प्रतिबंधित बताकर उनके चलन पर रोक लगाई तो जिले में लोग नौ नवंबर की सुबह से ही बैंकों में पुराने जमा कराने पहुंचने लगे। शुरू के दिनों में बैंकों में कैश जमा करने के लिए भीड़ जबरदस्त रही। जिसे काबू में करने के लिए बैंक अधिकारियों को पसीना आया। नोटबंदी के 50 दिन में बैंकों में पुरानी करेंसी जमा करने वालों की भीड़ लगातार रही।
जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक दूधनाथ ने बताया कि नोटबंदी के बाद से 50 दिन में जिले की 109 शाखाओं पर 565 करोड़ रुपये एक हजार और 500 के नोटों के रूप में जमा हुए। जबकि इन्हीं 109 बैंक शाखाओं खाताधारकों को 147 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। बताया कि 50 दिन बीतने के बाद जब आरबीआई ने बैंकों की स्थिति जानी तो उसमें खाताधारकों को भुगतान के मामले में एसबीआई जिले में नंबर वन रहा, तो वहीं वहीं खाताधारकों से पुरानी करेंसी जमा कराने के मामले में सेंट्रल बैंक नंबर वन रहा।
बताया कि 31 दिसंबर को पुरानी करेंसी बैंकों में कुछ हद तक पहुंची। अब बैंकों में पुरानी करेंसी जमा नहीं हो रही है। पुरानी करेंसी जमा करने लिए लोगों को अब सीधे आरबीआई जाना होगा। बता दें कि आठ नवंबर के बाद से 30 दिसंबर तक 13 दिनों की छुट्टियां रहीं हैं। जिनमें आठ रविवार और चार शनिवार के साथ ही तीन अन्य छुट्टियां रहीं हैं।