औरैया। शहर की साहित्यिक संस्था जनकल्याण साहित्य समिति के तत्वाधान में तिलक शोध संस्थान के सभागार में पं. बाल गंगाधर तिलक के जन्म शताब्दी के अवसर पर विचार गोष्ठी की गई। गोष्ठी में लोकमान्य तिलक के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला गया। गोष्ठी की अध्यक्षता रामनाथ गुप्ता एवं अध्यक्षता एस.के चतुर्वेदी ने की।
पं. बाल गंगाधर तिलक के जन्म शताब्दी के अवसर पर कवि रमेशचंद्र शर्मा ने कहा कि तिलक-तिलक हैं, तिलक रह्ेंगे सदा तथा तिलक को आज सारा जग पहचनता है। राजकुमार शुक्ल ने अपनी पंक्ति शुद्वतम तन, शुद्वतम मन, प्राण लेकर जी सकूं, चेहरे पे मैं शुद्वतम मुस्कान तो कर जी सकूं। कोई भी मुश्किल की घड़ी देश पे आ गई, उस समय हाथों में अपनी जान लेकर जी सकूं। साहित्यकार गोविंद द्विवेदी ने कहा कि अंधेरी राह पर दीपक जलाना काम है मेरा, अश्रु के सिंधु में मुस्कान की नौका चलाता हूं। हर मां से भारत की खातिर बेटा एक मांगता हूं, वीर सिपाही जैसा जीवन सच्चा नेक मांगता हूं। गोष्ठी के दौरान राधेश्याम गुप्ता, गिरीश बाजपेई, पुष्पक शुक्ला, अजय शुक्ला, अवधनारायन गुप्ता, रमेशचंद्र मौजूद रहे।