औरैया। शहर के आर्य समाज मंदिर परिसर में रविवार को फर्जी समिति के गठन को लेकर जमकर हंगामा हुआ। इसके बाद तत्कालीन प्रधान व पदाधिकारियों ने अपने को मंत्री बताने वाले पदाधिकारी को सर्व सम्मति से छह वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया। इससे पूर्व शनिवार को उक्त पदाधिकारी के खिलाफ फर्जी समिति गठित कर आर्य समाज मंदिर पर कब्जा करने का प्रयास करने के आरोप में कोतवाली में मामला दर्ज कराया गया है।
दिबियापुर रोड स्थित आर्य समाज मंदिर में रविवार को अपने को समाज का मंत्री बताने वाले पूर्व पदाधिकारी वेद प्रकाश आर्य को लेकर हंगामा मचा रहा। समाज के तत्कालीन प्रधान अनिल आर्य ने हवन में मौजूद वेद प्रकाश आर्य द्वारा अपने को मंत्री बताए जाने पर जमकर बखिया उधेड़ी। प्रधान ने कहा कि समाज की समिति का चुनाव 6 जनवरी 2013 में हुआ था। समाज के नियम के मुताबिक अगला चुनाव 2014 में होना था। इसी बीच खुद को मंत्री बताने वाले वेद प्रकाश आर्य ने कालातीत हो चुके आर्य प्रतिनिधि सभा उत्तर प्रदेश के पूर्व प्रधान देवेंद्र पाल वर्मा से फर्जी तरीके से पत्र जारी करा एक फर्जी कमेटी गठित कर दी। जिसमें स्वयं को आर्य समाज औरैया का मंत्री, महेश चंद्र आर्य को प्रधान व अरुण कुमार को कोषाध्यक्ष घोषित कर दिया। इसकी जितनी भी निंदा की जाए कम है। इस मौके पर समाज के पूर्व प्रधान डा.सर्वेश आर्य व वर्तमान प्रधान अनिल आर्य ने मौजूद समिति से हाथ उठवाकर सर्व सम्मति से वेद प्रकाश आर्य व अशोक आर्य को छह वर्ष के लिए आर्य समाज समिति से निष्कासित कर दिया। समाज के प्रधान अनिल आर्य ने बताया इस फर्जीबाड़े की जानकारी उन्हें तब हुई जब गत 5 अक्टूबर को उनके पास वेद प्रकाश आर्य मंत्री आर्य समाज का एक पत्र आया। तब वह चौंके कि आर्य समाज में अचानक बिना चुनाव पदाधिकारी कैसे बदल गए। इसके बाद आनन-फानन में समिति की बैठक बुलाई गई। मामला फर्जी होने की स्थिति में कोतवाली में तहरीर दी गई। पुलिस ने तहरीर के आधार पर वेद प्रकाश के खिलाफ धोखाधड़ी करने के आरोप में मामला दर्ज कर लिया है।
जानमाल की सुरक्षा की गुहार लगाई
वेद प्रकाश आर्य ने पुलिस को दी तहरीर में कहा कि आर्य समाज प्रतिनिधि सभा उत्तर प्रदेश के प्रधान देवेंद्र पाल वर्मा ने 30 सितंबर को भेजे गए पत्र के माध्यम से उनके द्वारा गठित कमेटी के निर्वाचन को मान्यता प्रदान कर दी है। इसके अलावा वर्मा ने फोन कर आर्य समाज की कार्यकारिणी गठित का प्रस्ताव अनुमोदन के लिए भेजने को निर्देशित किया था। बताया था कि तत्कालीन आर्य समाज के पदाधिकारियों के खिलाफ धन की हेराफेरी की जांच चल रही है। जिस पर शीघ्र निर्णय होने के बाद कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि समाज के प्रदेश प्रधान के निर्देश के अनुपालन में रविवार को नई कार्यकारिणी सुबह लगभग 10 बजे आर्य समाज मंदिर पर सत्संग के उपरांत शुरु हुई। सत्संग समाप्त होने पर जब वह माइक से बोल रहे थे। तभी प्रदेश प्रधान द्वारा निष्कासित डा.सर्वेश आर्य व वीरेंद्र आर्य के अलावा अनिल गुप्ता आ गए। डा.सर्वेश आर्य ने उनके हाथ से माइक छीन लिय तथा अभद्रता कर जान से मारने की धमकी दी। इस पर वह घर चले आए। तभी उक्त लोग पीछा करते हुए उनके घर में घुस गए। इस दौरान डा.सर्वेश आर्य ने कालर खींची तथा सीने पर रिवाल्वर तान दी। साथ आए वीरेंद्र ने जेब में पड़े तीन हजार रुपये निकाल लिए। फिर वे रिवाल्वर लहराते चले गए। उन्होंनेतहरीर में अपनी व परिवार की जानमाल की सुरक्षा किए जाने की मांग की है।
पदाधिकारी होने से किया इंकार
औरैया। फर्जी तरीके से गठित कार्यकारिणी में प्रधान पद पर नियुक्त महेश चंद्र आर्य ने रविवार को आर्य समाज मंदिर में सार्वजनिक तौर पर कहा कि उक्त गठित कमेटी वह शामिल नहीं है और न ही उन्होंने अपने को प्रधान बनाने की सहमति दी थी।