जिले में पीने के पानी में लगातार फ्लोराइड की मात्रा बढ़ती जा रही है। नवंबर माह में पानी का सर्वेक्षण हुआ। उसमें 80 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं जिनका पानी पीने लायक नही रहा है। यहां पर फ्लोराइड की मात्रा सामान्य से बढ़कर दो गुने से भी अधिक हो गई है।
पीने के पानी में सामान्यत: फ्लोराइड की मात्रा 0.75 पीपीएम होनी चाहिए मगर जिले के पानी में यह मात्रा बढ़कर 1.4 पहुंच गई है। फ्लोराइड की मात्रा बढ़ने से पानी से कई प्रकार के रोगो के होने का खतरा बना हुआ है। नवंबर माह में जल निगम ने ग्राम पंचायतों के पानी का जो सवेक्षण किया उसमें 80 ग्राम पंचायतें ऐसी निकली जहां पर पानी में फ्लोराइड की मात्रा 2.5 पहुंच गई है। यह मात्रा अब खतरें के निशान पर है। एनआरडब्लूपी कार्यक्रम के तहत जिले में सर्वे के आंकड़े अब इन ग्राम पंचायतों में पानी पीने लायक नही बता रहे है।
जिले की 476 ग्राम पंचायतों में यह सर्वे किया गया। जबकि अन्य ग्राम पंचायतों में भी फ्लोराइड की मात्रा बढ़ी हुई ही निकली। मगर इन 80 ग्राम पंचायतोें में सबसे अधिक फ्लोराइड निकला। ब्लाक एरवाकटरा, सहार और अछल्दा तीनों ब्लाकों में करीब 48 ग्राम पंचायते है जहां के पानी में फ्लोराइड अधिक मात्रा में पाया गया है, बांकी ब्लाकों की 32 ग्राम पंचायतें हैं।
कस्बों में भी फ्लोराइड की मात्रा अधिक
यह सर्वे ग्राम पंचायतों में किया गया। मगर कस्बों में भी पीने के पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक है। 2014 में हुए एक सर्वे में दिबियापुर में फ्लोराइड की मात्रा 2.5 पीपीएम से भी अधिक निकली थी। जबकि फफूंद, बिधूना व औरैया में भी फ्लोराइड की मात्रा निकली।
फ्लोराइड से होने वाले दुष्प्रभाव
फ्लोराइड के पानी से हड्डियों के रोग उत्पन्न होते है,पेट सम्बंधी विकारों में बढ़ोत्तरी, आलस्य और कमजोरी को महसूस करना, नर्वस सिस्टम प्रभालित होना आदि दुष्प्रभाव है।
वाटर क्वालिटी प्राब्लम विलेज को दूर करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार 50-50 प्रतिशत अनुदान देती है। इससे बढ़े हुए फ्लोराइड को दूर किया जाता है। बढ़ी हुई मात्रा को दूर करने के लिए गहरी बोरिंग, डीप बोरिंग में केमिकल्स मिलाये जाते हैं। सर्वे की रिपोर्ट केंद्र और राज्य सरकार को भेज दी गयी है।
अमन यादव, जेई, जल निगम