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गंदगी की भरमार, स्वास्थ्य सेवा बदहाल, ग्रामीण लाचार

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अमर उजाला ब्यूरो
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उरई। बारिश के मौसम में गांव-कस्बों में फैली गंदगी बीमारियां बांट रही है। घर-घर में वायरल और डायरिया के मरीज हैं। उस पर सीएचसी, पीएचसी की हालत यह है कि कहीं दवा नहीं है तो कहीं डॉक्टर नदारद हैं। ऐसे में ग्रामीणों को मजबूरन झोलाछापों का सहारा लेना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि साफ सफाई पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। कीचड़ से सनी सड़कों पर नालियों का नामोनिशान तक नहीं है। बीमारियों से निपटने के लिए स्वास्थ्य सेवाएं भी बेहतर नहीं की गईं। समस्याओं से घिरे ग्रामीण इलाकों की सुध लेने न तो कोई नेता पहुंच रहे हैं और न अधिकारी। सीएमओ अल्पना बरतरिया का कहना है कि समय समय पर स्वास्थ्य केंद्रों का निरीक्षण कर वहां की कमियों को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।


सरावन के स्वास्थ्य केंद्र में पिछले छह साल से डॉक्टर ही नहीं है। करीब 50 हजार की आबादी झोलाछाप डॉक्टरों पर आश्रित है। सफाई कर्मी भी कस्बे में झांकने नहीं आते हैं, फिर गांव की कौन कहे। इस वक्त वायरल और डायरिया के मरीज अधिक आ रहे हैं। प्रमोद कुमार, नीलम, अनिल कुमार का कहना है कि सिर्फ फार्मासिस्ट के सहारे अस्पताल चल रहा है। यहीं हाल रामपुरा का भी है। यहां की गलियां कीचड़ और गंदगी से पटी पड़ी है, जिससे मच्छरों की भी भरमार हो गई है। डॉक्टर समीर प्रधान का कहना है कि लोगों को चाहिए कि अपने आसपास साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें, जिससे बीमारियों से बचाव किया जा सके।
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सिरसा स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर गोपाल दुबे का कहना है कि रोजाना 20 से 25 मरीज बुखार के आ रहे हैं। केंद्र में एलटी न होने से मरीजों को जांच के लिए उरई या फिर जालौन जाना पड़ता है। क्षेत्र निवासी महेंद्र सिंह, राजेश सिंह का कहना है कि बीमारी की हालत में मरीजों को इतनी दूर जाना और कष्टकारी होता है। कदौरा केंद्र की महिला डॉक्टर प्रतिज्ञा का कहना है कि इस मौसम में डायरिया, मलेरिया के मरीज ज्यादा आ रहे हैं । गर्भवती महिलाओं को दस्त, खांसी, बुखार की शिकायत है। बचाव के लिए दवा के साथ साथ साफ सफाई भी बेहद जरूरी है।

-नेता और अधिकारी कोई भी झांकने नहीं पहुंच रहा, रोष व्याप्त
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