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नगर निकाय चुनाव में थर्ड जेंडर की गणना ही नही हुई

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अमर उजाला ब्यूरो
औरैया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से नगर निकाय चुनाव में किन्नर किसी भी सीट से चुनाव मैदान में ताल ठोक सकते हैं। इसके लिए महिला या पुरुष की आरक्षण की सीट आड़े नहीं आएंगी। राज्य निर्वाचन आयोग के विशेष कार्याधिकारी ने इस आशय का एक आदेश जारी किया है। मगर नगर निकाय चुनाव में थर्ड जेंडर की गणना ही नही की गई है।

आयोग ने 10 अक्टूबर 2005 के पत्र के मुताबिक थर्ड जेंडर पुरुष की श्रेणी में माने गए थे, जिसके बाद ये उच्च न्यायालय नई दिल्ली की शरण में गए थे। वर्ष 2012 में नेशनल लीगल सर्विसेज अथार्टी बनाम भारत संघ व अन्य के इस मामले की सुनवाई करते हुए 15 अप्रैल 2014 को आदेश पारित हुआ, जिसमें त्रिस्तरीय पंचायतों एवं नगरीय निकायों के निर्वाचन में किन्नर अपनी इच्छा अनुसार पुरुष अथवा महिला की श्रेणी में नामांकन कर सकते हैं।
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अब मतगणना में उनको जोड़ा ही नहीं गया। नगर निकाय की मतगणना में थर्ड जेंडर का कालम ही नहीं था। जबकि फरवरी में हुए विधानसभा चुनाव में औरैया से 16, दिबियापुर में छह व बिधूना में 15 थर्ड जेंडरों की गणना हुई थी। मगर नगर निकाय की सूची में यह कालम नहीं है। अब अगर कोई ऐसे में चुनाव लड़े भी तो जब मतदाता सूची में नाम ही नहीं तो कैसे लड़ सकता है। सहायक निर्वाचन अधिकारी रावेंद्र सिंह ने बताया कि थर्ड जेंडर का कालम नहीं है। महिला व पुरुष का ही कालम था।

-महिला या पुरुष की आरक्षण की सीट आड़े नहीं
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