औरैया। शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश की प्रक्रिया में इस बार बड़ी संख्या में अभिभावकों की गलती सामने आई है।
दूसरे चरण में आए 554 आवेदनों में से करीब 298 आवेदन केवल इस वजह से निरस्त हो गए क्योंकि अभिभावकों ने आवेदन करते समय दूसरे वार्ड या ग्राम पंचायत के स्कूल का चयन कर लिया। नियम के अनुसार अभिभावकों को अपने ही वार्ड या ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले स्कूल का चयन करना अनिवार्य है।
दूसरे चरण में कुल 554 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 142 बच्चों को स्कूल आवंटित कर दिया गया। वहीं, जांच के दौरान 22 आवेदनों में आय प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाने पर उन्हें भी निरस्त कर दिया गया।
इस बार शासन की ओर से नियम में बदलाव करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि अभिभावक अपने ही वार्ड या ग्राम पंचायत क्षेत्र के स्कूल का चयन करें लेकिन यह जानकारी बड़ी संख्या में अभिभावकों तक सही ढंग से नहीं पहुंच सकी। वहीं अन्य आवेदन अभी बाकी हैं।
इसके चलते आवेदन करते समय लगातार गलतियां सामने आ रही हैं और कई पात्र बच्चे प्रवेश से वंचित हो जा रहे हैं। इससे पहले आरटीई के पहले चरण में भी 102 ऐसे ही आवेदन निरस्त हो चुके हैं, अब 298 पात्र बच्चे इस गलती के कारण प्रवेश प्रक्रिया से बाहर हो गए। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि अभिभावकों को आवेदन करते समय वार्ड या ग्राम पंचायत का सही चयन करना बेहद जरूरी है, नहीं तो आवेदन निरस्त हो जाता है।
आरटीई प्रवेश प्रक्रिया का दूसरा चरण 23 फरवरी से 7 मार्च तक चला। अब तीसरा चरण 12 मार्च से 25 मार्च के बीच आयोजित होगा। विभागीय अधिकारियों के अनुसार जिन अभिभावकों के आवेदन पहले और दूसरे चरण में गलती के कारण निरस्त हो गए हैं, उनके पास तीसरे चरण में आवेदन करते समय अपनी गलती सुधारने का मौका होगा।
बीएसए संजीव कुमार ने अभिभावकों से अपील की है कि आवेदन करने से पहले वार्ड या ग्राम पंचायत और स्कूल का चयन सावधानी से करें, ताकि बच्चों को आरटीई के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश का लाभ मिल सके।