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माध्यमिक विद्यालयों में अब कंप्यूटर शिक्षा को लग गया ग्रहण

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अमर उजाला ब्यूरो
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औरैया। एक ओर जहां देश और प्रदेश की सरकार कंप्यूटर शिक्षा को बढ़ावा देने का दावा कर रही है वहीं माध्यमिक विद्यालयों में कंप्यूटर शिक्षा पर ग्रहण लग गया है। विद्यालयों में चल रही आइटीसी योजना बंद कर दी गई है। इसके चलते एक साल से कंप्यूटर धूल फांक रहे हैं तो कई कालेजों में कंप्यूटर ही गायब हो गए हैं।

देश की युवा पीढ़ी को कंप्यूटर शिक्षा में पारंगत करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2009 में आइसीटी योजना लागू की गई। शिक्षा पर 75 फीसदी केंद्र सरकार व 25 फीसदी राज्य सरकार को खर्च करना था। सूबे में इस योजना के तहत छह हजार माध्यमिक विद्यालयों में कंप्यूटर शिक्षा देना था। प्रथम चरण में ढाई हजार तथा दूसरे चरण में 1500 विद्यालयों को लिया गया, लेकिन तीसरे चरण से प्रक्रिया बंद कर दी गई। इन विद्यालयों में कंप्यूटर शिक्षा देने के लिए दस कंप्यूटर, एक प्रिंटर, एक जनरेटर और एक वेब कैमरा दिया गया था। जनरेटर में ईंधन के लिए एलपीजी गैस देनी थी।
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शिक्षा देने की जिम्मेदारी पांच साल के लिए एबरान व एक्ट्रामार्क कंपनी को सौंपी गई। बच्चों में बढ़ती रुचि और संख्या को देखते हुए सरकार ने सभी विद्यालयों को कंप्यूटर विषय की मान्यता तो दे दी लेकिन व्यवस्था के नाम पर कुछ भी नहीं हुआ। करार पूरा होने के बाद कंपनी को किनारे कर दिया। जिसके कारण तीन साल से कंप्यूटर धूल फांक रहे हैं। वहीं, जिले के अधिकतर स्कूलों में शिक्षक न होने के कारण कंप्यूटर शिक्षा कागज तक सिमट गई है। जिससे हजारों छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है।

बेरोजगार हुए प्रशिक्षक
पांच साल से विद्यालयों में कंप्यूटर शिक्षा दे रहे प्रशिक्षक बेरोजगार बैठे हैं। माध्यमिक कंप्यूटर अनुदेशक एसोसिएशन के बैनर तले प्रशिक्षकों ने अन्य प्रांतों की तरह स्थाई करने की मांग को लेकर आंदोलन किया, लेकिन उनकी मांग अनसुनी कर दी गई। पूर्ववर्ती सपा सरकार में आदेश हुआ था कि दस हजार रुपये मानदेय पर प्रशिक्षकों से सेवा ली जाए। सरकार बदलने के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। बेरोजगार युवकों को उम्मीद थी कि भाजपा सरकार में उनका भला होगा लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी।
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कंप्यूटर प्रशिक्षण के लिए पांच साल तक निजी कंपनी से एग्रीमेंट किया गया था। इसी दौरान संबंधित विद्यालयों के सभी शिक्षकों को कंप्यूटर शिक्षा देने के लिए प्रशिक्षित होना था लेकिन ऐसा नहीं हो सका। शासन स्तर से कोई हल निकाला जाएगा। - चंद्र प्रताप सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक
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