अजीतमल (औरैया)। जनता इंटर कालेज में दो दिवसीय पूर्व छात्र एवं शिक्षक समारोह में शनिवार की रात अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस दौरान जाने माने कवियों ने एक से एक बेहतरीन रचनाएं सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कवि सम्मेलन का शुभारंभ नगर पंचायत चेयरमैन रानी पोरवाल एवं पूर्व चेयरमैन मदन लाल ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर किया। कवयित्री गीता चतुर्वेदी ने सरस्वती वंदना पढ़ी। इसके बाद उन्होंने सुनाया ‘अहम के पर्वतों को फिर उठाओ देवकी नंदन, व्यथा है बांसुरी को फिर बजाओ देवकी नंदन, खड़े है कौरवों के दल ग्रहण है लाज पर भारी, बचानी है अगर गीता तो आओ देवकी नंदन।’ इसी क्रम में कानपुर से आए डॉ. अरुण तिवारी ‘गोपाल’ ने ‘संवेदन के अर्घ चढ़ाऊं मैं किसको, घर की तुलसी नस्ल बदलकर चीड़ हुई है, घर में संबंधों की छतें ध्वस्त हुई है, बस आंगन में दीवारों की भीड़ हुई है।’
पंक्तियां सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। अजय ‘अंजाम’ ने सुनाया ‘बाहर के दुश्मन से तो हम जंग जीत ले जब चाहे, हम तो बाजी हार रहे हैं भीतर के गद्दारों से।’ कानपुर के धीरज ने पढ़ा ‘दौलत शोहरत गाड़ी बंगला चमक धमक है फिर भी क्यूं हर पल हमको खलती रहती कमी तुम्हारी पापा जी।’ मैनपुरी से आए बलराम श्रीवास्तव की रचना ‘प्राण और देह का आवरण जिंदगी, देह के ग्रंथ का व्याकरण जिंदगी।’ काफी सराही गई। हाथरस से आए पदम अलबेला की रचना ‘सज धज के गोरी चली लेकर हरि का नाम, आशा की थी राम की मिल गए आशा राम।’ सुनाकर लोगों को खूब गुदगुदाया।
आयोजन समिति के सदस्य सुदीप दुबे व अवनीश दीक्षित कवियों को माला पहनाकर स्वागत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पदम अलबेला व संचालन अजय ‘अंजाम’ ने किया। इस दौरान एलेश अवस्थी (आगरा), सबरस मुरसानी (मुरसान), चेतना शर्मा (आगरा) व डॉ. गोविंद द्विवेदी ने भी काव्य पाठ किया।