औरैया। गर्मी से लोगों का हाल बेहाल हो रहा है। सूरज की तपिश मेें मनुष्य बेबस है। 25 मई से शुरू हुए नौतपा में तापमान तेजी से बढ़ रहा है, जिससे लोगों का हाल-बेहाल है। मौसम विशेषज्ञ की मानें तो नौतपा के समाप्त होने के बाद भी इसका असर कम से कम 10 दिनों तक रहेगा।
नौतपा जेठ के महीने में पड़ने वाले वे नौ दिन हैं, जिसमें माना जाता है कि भीषण गर्मी पड़ती है। इसकी शुरुआत 25 मई को हो चुकी है। मौसम विशेषज्ञ के अनुसार गुरुवार को अधिकतम तापमान सामान्य से सात डिग्री अधिक 46.5 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान सामान्य से पांच डिग्री अधिक 30.1 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। हवाओं की गति दिन के समय पश्चिम दिशा में 9 से 18 किलोमीटर प्रति घंटा और रात के समय पश्चिम-उत्तर दिशा में नौ से 18 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दर्ज की गई। इसके साथ ही मौसम में आर्द्रता 48 और 29 प्रतिशत रिकार्ड की गई।
भीषण गर्मी और तेज धूप के चलते गुरुवार की सुबह 10 बजे से सड़कों पर भीड़ नदारद दिखी। आलम यह रहा कि सूरज ढलने के बाद भी भीड़ दिखी लेकिन कम। सूरज ढलने के बाद तापमान 43 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। गर्मी और तेज धूप के चलते लोग मजबूरी में ही घरों से निकले। घरों से निकलने वालों ने धूप से बचाव के पूरे इंतजाम किये, लेकिन वह भी नाकाफी दिखे। सड़कों पर निकले लोग छांव और पानी की तलाश करते दिखे। छाव देखते और प्याऊ देखते ही लोग वहां रुके और कुछ देर रुकने के बाद आगे बढ़े।
बढ़ती गर्मी और उमस से बीमारियां अक्सर जून माह में अधिक होती है। इन दिनों जिला अस्पताल में हर रोज 600 से 700 के बीच मरीज पहुंच रहे हैं। जिला अस्पताल में गुरुवार को 625 मरीजों ने अपना पंजीकरण कराया। 10 मरीजों को वायरल व डायरिया के चलते अस्पताल में भर्ती किया गया। हालांकि देरशाम इन मरीजों को अस्पताल से छुट्टी भी मिल गई। इधर चिकित्सकों की मानें तो जून का महीना भले ही गर्म रहता हो लेकिन अस्पताल में मरीजों की भीड़ मई माह में अधिक आती है। डा. अमित पोरवाल ने बताया कि गर्मी से मरीजों में अक्सर डायरिया के साथ ही त्वचा संबंधी रोग भी देखने को मिल रहे हैं। पिछले साल मई माह में 14863 मरीज ओपीडी मेें देखे गए, जिनमें 40 फीसदी रोगी त्वचा संबंधित थे। मरीजों की यह संख्या पिछले साल अप्रैल से अधिक थी। ओपीडी आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल माह 11168 मरीज ओपीडी में पंजीकृत हुए। जबकि मई माह में अभी तक 10 हजार के करीब मरीज ओपीडी में अभी तक पंजीकृत हो चुके है। इनमें सबसे अधिक त्वचा, डायरिया, वायरल फीवर के मरीज हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. जीपी चौधरी ने बताया कि यदि व्यक्ति इस माह सावधानी बरते तो वह बीमारियों से बच सकता है। बताया कि बढ़ता तापमान और उमस व्यक्ति को बीमारी की चपेट में ले लेता है। बताया कि उमस के चलते बच्चों को भी शरीर में कई दिक्कतें होती हैं।
डा.अमित पोरवाल ने बताया कि मौसम परिवर्तन के चलते अस्पतालों में इन दिनों भीड़ अधिक देखने को मिलती है। बताया कि सबसे अधिक भीड़ मई माह में देखने को मिलती है। इस बार भी अस्पताल का हाल भी पहले जैसा ही देखने को मिल रहा है। सबसे अधिक मरीज मेडिसिन विभाग में आते हैं। यहां पर सभी तरह की बीमारियों का इलाज किया जाता है। बताया कि शरीर का तापमान बनाए रखने के लिए पानी का उपयोग अधिक से अधिक करें। धूप से आने के बाद तुरंत पानी न पीयें, धूप में जाने से बचें, अधिक टाइट कपड़े न पहनें, पेय पदार्थ जूस व तरस पदार्थों का सेवन करें।