फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आढ़तों पर गेहूं की भरमार, सरकारी क्रय केंद्रों पर किसानों का इंतजार

विज्ञापन
विज्ञापन
औरैया। किसान सरकारी गेहूं क्रय केंद्रों से मुंह मोड़ता दिख रहा है। हालत यह है कि आढ़तों पर जहां गेहूं का भंडारण है वहीं सरकारी क्रय केंद्रों पर सन्नाटा सा पसरा हुआ है। ऐसे में लाख कोशिशों के बाद भी सरकारी मंशा को कुठाराघात होता दिख रहा है। किसानों को बिचौलियों से बचाने के लिए खोले गए सरकारी क्रय केंद्रों से ज्यादा गल्ला मंडी की आढ़तों पर गेहूं की आवक नजर आ रही है। इसकी बानगी मंगलवार को गल्ला मंडी के साथ-साथ सरकारी गेहूं क्रय केंद्रों की पड़ताल के दौरान नजर आई।
विज्ञापन


गल्ला मंडी पहुंचने पर गेट से घुसते ही अंदर बनी आढ़तों पर जहां गेहूं के ढेर लगे दिखाई दिए। मौके पर मौजूद पल्लेदार बोरियों में गेहूं पैक करते दिखे। अभी आढ़त पर कई जगह लगे गेहूं के ढेर बोरियों में पैक भी नहीं हो पाए थे कि तभी दो ट्रैक्टर गेहूं भरी बोरियों को ट्राली में लेकर फिर आढ़त पर रुक गए। इससे जहां आढ़ती के चेहरे पर खुशी दिखाई दी तो वहीं किसान भी तत्काल पैसा मिलने पर संतुष्टि दिख रहे थे।

गल्ला मंडी पहुंचते ही नेफेड के गेहूं क्रय केंद्र पहुंचने पर वहां सन्नाटा पसरा दिखाई दिया। मौके पर मिले केंद्र प्रभारी ऋषि मिश्रा ने बताया कि शुरुआत से लेकर अब तक उनके केंद्र पर बोहनी तक नहीं हुई है। बताया कि सोमवार को किसी तरह से दो किसानों को समझा बुझाकर केंद्र पर गेहूं बेचने के लिए राजी भी किया था लेकिन मंडी आने पर जब आढ़तों पर प्रति क्विंटल लगभग 1800 रुपये दाम मिलते देख मन बदल गया और उन किसानों ने भी आढ़त पर पहुंचकर गेहूं बेच दिया। अभी तक एक दाने की भी खरीद नहीं की है।
विज्ञापन


इसके उपरांत अगले गेहूं क्रय केंद्र कर्मचारी कल्याण निगम पर पहुंचने पर केंद्र प्रभारी श्रीमन नारायण शुक्ला मौजूद मिले। केंद्र के बाहर पूरी तरह से सन्नाटा मिला। एक तरफ कांटा बंद रखा था। केंद्र प्रभारी ने बताया कि आज दो किसानों से खरीद होनी है। अब तक कुल 61 किसानों से 2995 क्विंटल 50 किलो गेहूं की खरीद की जा चुकी है। केंद्र पर सन्नाटा होने की बात पर बोले कि बाजार में किसान को 1750 से 1780 रुपये प्रति क्विंटल की दर से तत्काल नगद रुपया मिल रहा है। इसी वजह से किसान गेहूं क्रय केंद्र की तरफ कम रुख करता दिख रहा है।

यूपी एसएस के गेहूं खरीद केंद्र पहुंचने पर केंद्र के बाहर न कांटा मिला और न ही गेहूं के ढेर, सन्नाटा होने के बारे में जब मौजूद केंद्र प्रभारी मलखान सिंह से पूछा तो बताया कि सुबह दो किसान आए थे। इनसे 37 क्विंटल ही गेहूं की खरीद हो सकी। बताया कि अब किसान आ ही नहीं रहा है। इस पर हाथ पर हाथ धरे किसान का इंतजार कर रहे हैं। बताया कि अब तक उनके केंद्र पर 41 किसानों से 1867 क्विंटल 50 किलो गेहूं की खरीद की जा चुकी है।

जालौन निवासी संतोष अग्निहोत्री ने बताया कि इतनी खेती नहीं है कि क्रय केंद्रों पर बेचकर फिर खाते में पैसा आने का इंतजार किया जा सके। बाजार में लगभग 1780 रुपये प्रति क्विंटल के दाम जब नगद मिल रहे हैं तो थोड़े से लालच के लिए सरकार क्रय केंद्रों पर जाने का क्या मतलब है। पहले गेहूं बेचे फिर खाते में रुपये का इंतजार करें। ऐसे में रुपयों की जरूरत पड़ने पर दूसरों से मांगते फिरें। इसलिए बेहतर यह है कि नगद बेचो, रुपये लो और आराम से घर जाओ।


ग्राम लोहई निवासी मनी पाल ने बताया कि वह 15 क्विंटल गेहूं लेकर गल्ला मंडी में आए हैं। उन्हें रुपयों की जरुरत है। अब अगर क्रय केंद्र पर 1840 व 20 रुपये पल्लेदारी के चक्कर में गेहूं बेच देंगे तो फिर रुपयों की जरूरत कहां से पूरी करेंगे। आढ़त पर बिना किसी समस्या के 1750 रुपये प्रति क्विंटल पर गेहूं बेच दिए हैं। रुपये भी नगद मिल गए हैं। अब घर जरूरत के सभी सामान खरीदकर ले जा सकेंगे।

गल्ला मंडी में स्थित गेहूं क्रय केंद्रों पर मंडी आढ़तों की खरीद पर दी जा रही किसानों को त्वरित नगदी की व्यवस्था से थोड़ा फर्क पड़ा है। ग्रामीण क्षेत्रों में उनके केंद्रों पर बहुत अच्छी खरीद चल रही है। इस कारण से सबसे अधिक ध्यान ग्रामीण क्षेत्रों में दिया जा रहा है।
विज्ञापन

सुधांशु चौबे
डिप्टी आरएमओ, औरैया
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें