औरैया। जिले के जो आला अधिकारी नियम और कानून का पालन करने की आम लोगों को नसीहत देते हैं वही नियम और मानकों की धज्जियां उड़ाने में लगे हुए हैं। इसकी बानगी अफसरों द्वारा उपयोग में लाए जा रहे वाहनों को देखकर लगाई जा सकती है। इन वाहन के नाम न तो टैक्सी का परमिट ही है और न ही टैक्सी परमिट के मुताबिक पीली नंबर प्लेट। अहम बात यह है कि जिले के उच्चाधिकारी होने से एआरटीओ भी इस ओर से अपनी आंखे बंद करने को मजबूर हैं। प्राइवेट गाड़ी पर उत्तर प्रदेश सरकार भी लिख रखा है।
शनिवार को विकास भवन पहुंचने पर वहां दो बड़े अफसरों के लिए तैयार खड़े अनुबंधित वाहनों को देखकर लगाया जा सकता है। इन वाहनों में एक पर लगे हूटर के साथ ही लिखा उत्तर प्रदेश सरकार नियमों के उल्लंघन की गवाही दे रहा है। वहीं किराए पर लगाए गए इन वाहनों के पास टैक्सी परमिट होना चाहिए। यही नहीं, इसके साथ ही इन वाहनों की नंबर प्लेट टैक्सी परमिट के नियम के मुताबिक पीले रंग की होनी चाहिए। लेकिन इन वाहनों को देखकर ऐसा दूर-दूर तक नहीं दिखाई दे रहा है। इसके चलते वाहन स्वामी निजी लाभ लेकर सरकार को टैक्सी परमिट के नाम पर देने वाले टैक्स को बचाकर पलीता लगाने में लगे हुए हैं। अहम बात यह है कि इसकी जानकारी एआरटीओ विभाग के अधिकारियों को होने के बावजूद उच्चाधिकारियों द्वारा वाहनों के उपयोग किए जाने के कारण उनके खिलाफ कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।
क्या कहते हैं जिम्मेदार-
सभी विभागों को मुख्य सचिव की ओर से काफी पहले जानकारी देकर व्यवसायिक परमिट के वाहनों को लगाए जाने के निर्देश दिए जा चुके हैं। इसके बाद भी नियमों की अनदेखी कर विभाग को टैक्स का नुकसान कराया जाना पूर्णतया नियम विरुद्ध है। ऐसे वाहनों का पूरा ब्यौरा पता करके उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।- मनोज कुमार सिंह, एआरटीओ
-अफसरों के वाहनों में मानक का उल्लंघन, आरटीओ विभाग के अधिकारी भी खामोश
अमर उजाला ब्यूरो