अमर उजाला ब्यूरो
बेला (औरैया)। पृथ्वीपुरा में रक्षाबंधन का त्योहार मातम में बदल गया। गांव के तीन युवकों की मौत से सन्नाटा पसर गया। मृतकों के घरों में सांत्वना देने वालों की भीड़ लग गई। वहीं परिजन बिधूना के लिए रवाना हो गए।
रक्षाबंधन के त्योहार पर गांव में हर तरफ खुशी का माहौल था। लोग एक दूसरे से मिल जुल रहे थे। बाहर नौकरी करने वाले युवा भी घर आए थे। ऐसे में दोपहर में जैसे ही तीनों की मौत की खबर आई, गांव का माहौल मातमी हो गया।
संजय के परिवार में तीन भाई व दो बहन थीं। बहनें घर में राखी बांधने की तैयारी कर रही थी तभी उसकी मौत की खबर आई। उधर, ध्रुव के दो भाई हैं और कोई बहन नहीं है। वह अपने दोस्तों संजय व प्रवीन की बहन से राखी बंधवाता था। प्रवीन मां-बाप का इकलौता बेटा था और उसकी दो बहनें हैं। ये रो रोकर कह रही थीं कि अब किसे राखी बांधें। बहनों के विलाप को सुनकर सभी की आंखें नम हो गईं।
बिधूना। गंभीर रूप से घायलों को लेकर पुलिस जब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिधूना पहुंची तो वहां स्वास्थ्यकर्मियों ने मानवता नहीं दिखाई। मरीजों को इमरजेंसी कक्ष तक पहुंचाने के लिये वहां स्ट्रेचर तक उपलब्ध नहीं कराया गया। सभी घायलों को पुलिस व परिजन उनके हाथ व पैर पकड़कर ले गए। यही नहीं घायलों को अस्पताल परिसर के बाहर फ र्श पर ही लिटाकर ड्रिप लगा दी गई।
बिधूना। यह हादसा नियमोें का पालन न करने में हुआ। बाइक पर दो युवक होते तो शायद हादसा न होता। एक बाइक पर चार लोग सवार हो गए और चालक तक हेलमेट नहीं लगाए था। अगर लापरवाही न की जाती तो शायद तीनों जानें बच जातीं।
-पृथ्वीपुरा में मृतकों के घरों पर सांत्वना देने वालों की भीड़