मुहम्मदाबाद। मौसम में अचानक आई गर्मी से गेहूं की फसलें प्रभावित हो रही है। तेज धूप से झुलसकर गेहूं का दाना सूखने लगा है। नलकूप खराब पड़े हैं और नहरें भी बंद हैं। ऐसे में किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें दिखने लगी हैं। किसानों का कहना है कि एक तो ठंड की रातों में जागकर अन्ना जानवरों से फसलों की रखवाली की, अब समय कटाई का समय आया तो कुदरत ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। रही सही कसर प्रशासन ने पूरी कर दी है। नहरों में पानी नहीं है और नलकूप भी खराब पड़े हैं। भगवान ही जाने क्या होगा।
डकोर ब्लाक के मुहम्मदाबाद गांव की खेती पूरी तरह से नहरों पर निर्भर है। 11 फरवरी को नहरें चालू की गई थीं और 20 फरवरी से पहले बंद भी कर दी गईं। इससे किसान तीन में से सिर्फ एक बार ही खेतों को पानी दे सके। अब जब दूसरी बार पानी देने का समय आया तो नहरों में पानी की जगह कीचड़ नजर आ रहा है। इसने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। आधे से अधिक सरकारी नलकूप पहले से ही खराब पड़े हैं।
ऐसे में कुछ लोग तो प्राइवेट ट्यूबवेल से 400 से 600 रुपये प्रति बीघा के हिसाब से पानी लेकर जैसे-तैसे काम चला रहे हैं। बाकी के किसान या तो आसमान की ओर निहार रहे हैं या फिर नहरों की ओर देख रहे हैं कि कब उनसे बहने वाला पानी खेतों तक जाएगा।
किसानों का कहना है कि यदि सूरज की तपिश इतनी न होती तो भी काम चल जाता है लेकिन पता नहीं था कि इतनी जल्द इस कदर गर्मी पड़ने लगेगी कि फसलों का रंग पीला पड़ने लगेगा। गुंडा निवासी किसान महाबली ने बताया कि उन्होंने अपने दस बीघा खेत में गेहूं की फसल बोई थी, लेकिन तेज धूप और पानी की कमी को देखते हुए मजबूरन प्राइवेट नलकूप से पानी देना पड़ रहा है।
इसी तरह मुहम्मदाबाद के किसान हनीफ ने बताया कि उन्होंने जैसे तैसे इधर उधर से रुपये का जुगाड़कर चार बीघा में गेहूं बोया था। मौसम और प्रशासन की बेरुखी देख लगता है कि सब कुछ बर्बाद हो जाएगा। किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष बृजेश राजपूत का कहना है कि वे डीएम से मिलकर नहरों को फुल गेज से चलाने की मांग करेंगे।
जिला कृषि अधिकारी राम मिलन परिहार ने बताया कि तापमान बढ़ने का असर सबसे अधिक गेहूं की फसल पर हो सकता है। इस कारण गेहूं का दाना पतला होने की संभावना बनी रहती है। दलहन व तिलहन की फसलें गर्मी से प्रभावित नहीं होंगी। फिलहाल गेहूं बोने वाले किसानों के लिए पानी का भी इंतजाम किया जा रहा है।
नलकूप खराब, नहरें बंद, अन्नदाता हो रहे परेशान
अमर उजाला ब्यूरो