सीन रिक्रिएशन के लिए डमी अतीक-अशरफ को हूबहू वही हुलिया दिया गया था जो वारदात वाले दिन असली अतीक व अशरफ का था। दोनों के सिर पर सफेद रंग का साफा भी बांधा गया था। सीन रिक्रिएशन में सबसे पहले धूमनगंज थाना प्रभारी राजेश कुमार मौर्य दोनों को पुलिस जीप से लेकर कॉल्विन अस्पताल गेट के बाहर पहुंचते हैं।
इसके बाद दोनों को नीचे उतारकर पुलिसकर्मी भीतर जाते हैं। अस्पताल गेट से कुछ कदम चलने के बाद ही मीडियाकर्मियों से बात करने के लिए डमी अतीक-अशरफ रुकते हैं और फिर अगले ही पल शूटर उन्हें गोली मार देते हैं। इसके बाद वहां अफरातफरी मचती है और फिर इसी दौरान तीनों शूटर सरेंडर कर देते हैं। फिर पुलिस उन्हें हिरासत में ले लेती है।
एसआईटी ने इन सवालों का ढूंढ़ा जवाब
-वारदात के वक्त मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों और शूटरों की पोजीशन क्या थी?
- क्या पुलिसकर्मी इस पोजीशन में थे कि वह शूटरों को रोक सकते थे?
- अतीक-अशरफ को शूटरों ने कितनी दूर से गोली मारी?
- शूटरों ने भागने की बजाय सरेंडर क्यों किया?
- किस पुलिसकर्मी ने किस शूटर को और किस प्वाइंट पर पकड़ा?
- वीडियो फुटेज व क्राइम सीन रिक्रिएशन के दौरान पुलिसकर्मियों की ओर से दिए गए बयान में कहीं अंतर तो नहीं है?
- क्या क्राइम सीन रिक्रिएशन के दौरान सामने आए तथ्य पुलिसकर्मियों के बयान की पुष्टि करते हैं या मेल खाते हैं?
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तो पुलिस ने दिया शूटरों का सरेंडर करने का मौका?
सीन रिक्रिएशन के बाद कुछ तथ्य सामने आए हैं और इसे लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। क्या हैं यह तथ्य और उन्हें लेकर उठ रहे सवाल...
- पहले शूटर ने अतीक व अशरफ को दो पुलिसकर्मियों के बीच से करीब जाकर गोली मारी। सवाल यह है कि पुलिसकर्मियों की नजर उस पर कैसे नहीं पड़ी?
- पहली गोली चलते ही मौके पर मौजूद इंस्पेक्टर व दरोगा दाहिनी तरफ अपने पीछे की ओर हट गए। ऐसा क्याें किया?
- गोली चलने के बाद अतीक-अशरफ को छोड़कर पुलिसकर्मी दूर हट गए। हत्याराें को पकड़ने या उन पर काबू पाने की बजाय ऐसा क्यों किया गया?
- अतीक अशरफ पर पहली गोली दागने वाले शूटर ने ही बाद में ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं। इसके बाद बावजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें दबोचने की कोशिश क्यों नहीं की?
- अतीक-अशरफ को जिस पुलिस जीप से लाया गया, उसे सीधे अस्पताल परिसर में भी लाया जा सकता था। फिर ऐसा क्यों नहीं किया गया?