उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में डिफेंस की ओर से गवाही देते हुए एम्स के रिटायर्ड डाक्टर आरके शर्मा ने मंगलवार को कोर्ट के समक्ष कहा कि आरुषि के माथे में जो चोट मारी गई, उससे वह बेहोश हो सकती थी। खून भारी मात्रा में निकला होगा और वह चीख पुकार नहीं कर पाई होगी। गवाह के बयान पूरे हो गए हैं।
कोर्ट ने गवाह से जिरह के लिए 10 जुलाई (बुधवार) की तारीख तय की है। मंगलवार को आरुषि-हेमराज मर्डर केस के आरोपी राजेश तलवार और नूपुर तलवार कड़ी सुरक्षा के बीच सीबीआई विशेष न्यायाधीश एस. लाल की कोर्ट में पेश हुए।
रिटायर्ड डॉक्टर आरके शर्मा ने कहा कि आरुषि की लाश का पोस्टमार्टम होने से करीब 8-10 घंटे पहले उसकी मृत्यु हुई होगी। क्योंकि गर्मी के कारण शरीर में अकड़न जल्दी बढ़ती है।
खाना खाने के चार घंटे बाद खाना अध पचा हो जाता है। अगले दो घंटे के अंदर पूरी तरह से अमाशय से निकल जाता है। चूंकि आरुषि के पेट में अध पचा खाना पाया गया था। इसलिए उसकी मृत्यु खाना खाने से 4-6 घंटे के बाद हुई होगी।
उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति के सिर के पीछे के हिस्से में चोट 8 सेंटीमीटर गुणा 2 सेंटीमीटर की पहुंचाई जाए तो वह व्यक्ति चोट लगने पर एकदम बेहोश हो जाएगा।
चोट से खून अधिक मात्रा में निकलेगा। अगर कोई व्यक्ति बेड पर बेड की तरफ मुंह करके लेटा हो और उसके सिर के पीछे के हिस्से में 8 सेंटीमीटर गुणा 2 सेंटीमीटर की चोट पहुंचाए जाए तो वह हिल नहीं पाएगा। वहीं बेड पर अचेत हो जाएगा।
अगर 13-14 साल का कोई बच्चा बेड पर लेटा हो और उसके पेराइटल बोन में 8 सेंटीमीटर गुणा 2 सेंटीमीटर की चोट पहुंचाई जाए तो वह बच्चा चोट लगने पर तुरंत बेहोश हो जाएगा। खून बड़ी मात्रा में निकलने लगेगा। बच्चा चीख पुकार नहीं कर पाएगा।
गवाह ने कहा कि पोस्टमार्टम के समय शव को काटने के लिए आमतौर पर स्कैलपेल नंबर-10 का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा हथौड़ा और आरी का भी प्रयोग किया जाता है।
सर्जन पैथोलॉजिस्ट और एनाटामी वाले स्कैलपेल नंबर-10 का अक्सर इस्तेमाल करते हैं। डेंटिस्ट स्कैलपेल नंबर-10 इस्तेमाल नहीं करते हैं क्योंकि इसका प्रयोग खाल काटने के लिए किया जाता है।
आरुषि का गला स्कैलपेल नंबर -10 से एक स्ट्रोक से नहीं काटा जा सकता है। क्योंकि स्कैलपेल नंबर-10 कमजोर होता है और हैंडिल का स्थान जहां पर उससे जोड़ा जाता है, कमजोर होता है। दबाव पड़ने पर वह कई बार टूट जाता है।