अमरोहा। कार्तिक पूर्णिमा के स्नान से एक दिन पूर्व यानी सोमवार को तिगरीधाम में गंगा नदी में दीपदान होगा। अपनों की आत्मा की शांति की कामना के लिए गंगा में दीप प्रज्ज्वलित कर प्रवाहित करने की परंपरा के चलते व्यापक तैयारियां की गई हैं। घाटों के किनारे दीपदान की बिक्री सोमवार की सुबह से ही शुरू हो जाएगी।
बता दें कि महाभारत के युद्ध में मारे गए लाखों लोगों की आत्मा की शांति की कामना के लिए युधिष्ठर द्वारा गंगा नदी में दीपदान करने की परंपरा आदिकाल से ही चली आ रही है। पंडित गंगाशरन शर्मा ने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाले गंगा मेले का इतिहास हस्तिनापुर से जुड़ा माना जाता है। बताते है महाभारत युद्ध के दौरान कौरव और पांडव के लाखों योद्धा रणभूमि में मारे गए थे। पांडव इससे काफी व्यथित और आहत थे। इसी के चलते भगवान श्री कृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठर को कार्तिक पूर्णिमा से एक दिन पूर्व पवित्र गंगा में दीपदान करने की सलाह दी थी। ताकि मृत लोगों की आत्मा को शांति मिल सके। पंडित राजू शर्मा ने बताया कि तिगरीधाम में दीपदान की परंपरा भी काफी प्राचीन है। दूर तक फैली गंगा के तट पर गंगा नदी में झिलमिलाते अनगिनत दीपों को देख अलौकिन नजारा उत्पन्न होता है। वहीं सोमवार की सुबह को तिगरीधाम में दीप वाले डलियों की बिक्री शुरू हो जाएगी।