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‘जो नहीं पहुंची किसी अंजाम तक, उस मोहब्बत की कहानी क्या लिखूं’

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अंजुमन यादगारे बका के संयोजन में शनिवार रात शहर के मोहल्ला नल में समाजसेवी इजहार अहमद जाफरी के आवास पर गजल की महफिल का आयोजन किया गया। शायरों ने एक के बाद एक बेहतरीन कलाम पेश करके समां बांध दिया।
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महफिल का आगाज नाते नबी से नाजिम अमरोहवी ने किया। अनुराग मिश्रा ने गजल पढ़ते हुए कहा कि जो नहीं पहुंची किसी अंजाम तक, उस मोहब्बत की कहानी क्या लिखूं। मयकश अमरोहवी ने कहा कि इस शहर में लिहाफ न कंबल न रजाई, फिर तुम भी जनवरी के महीने में आ गए। शीबान कादरी ने यूं कहा कि हम भी तेरी दुनिया में बहुत नाम कमाते, करता तू अगर हौसला अफजाई हमारी।
जुबैर इब्ने सैफी ने कहा कि आ गए तीर चलाने मुझको, अब लगाने हैं निशाने मुझ को। लियाकत अमरोहवी ने कहा कि बातों-बातों में कह गया सब कुछ, बाकी कहने को कुछ बचा ही नहीं। नाजिम अमरोहवी ने कहा कि तुम्हारी याद फिर आने लगी है, हमारे दिल को तड़पाने लगी है। अनीस अमरोहवी ने कहा कि एक शख्स ने जाने कैसी चोट खाई है, जब भी हाल पूछा है खैरियत बताई है। महफिल में इनके अलावा अशरफ फराज, डॉ लाडले रहबर, नासिर अमरोहवी, अंदाज अमरोहवी, माइल अमरोहवी, नाजिश मुस्तफा, फैज आलम आदि ने भी कलाम पेश किए। इस दौरान गुलरेज आरिफ, जिया उल बदर, वजाहत हुसैन, मोहम्मद आकिब, इंद्रपाल गोले आदि मौजूद रहे।
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