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Amroha News: ...जब चले यसरिब से सिब्ते मुस्तफा सूए इराक

Sat, 05 Jul 2025 02:15 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
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अमरोहा। शहर में आठ मोहर्रम का मातमी जुलूस अजाखाना चांद सूरज से बरामद हुआ। गमे हुसैन में अजादारों ने जंजीरों का मातम करके खुद को लहूलुहान कर लिया। फिजा में देर रात या हुसैन-या हुसैन कीं सदाएं गूंजती रहीं, जिससे माहौल गमगीन बना रहा।
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शुक्रवार को मोहल्ला काजीजादा स्थित अजाखाना चांदसूरज से हुसैनी काफिले की शुरुआत सुबह करीब साढ़े आठ बजे हुई। सफदर रजा और हमनवा ने मरसिया ...जब चले यसरिब से सिब्ते मुस्तफा सूए इराक पढ़ा। शुक्रवार का जुलूस और दिन के जुलूसों से जुदा था। इसमें सबसे आगे ऊंटों का काफिला था। जनाबे जैनब, उम्मे कुलसूम और उनके परिवार के लोगों की दस ऊंटों पर शबीहे आमारी सजी हुईं थीं। इसके बाद रौशन चौकियां और अराईश थी।
पीछे हुसैनी बाजे के साथ लगभग 50 जोड़ी कमनटे के अलम चल रहे थे। उलमा ने बताया कि सात मोहर्रम को इमाम हुसैन के काफिले पर कर्बला में पानी बंद कर दिया गया था। बच्चे भूखे और प्यासे थे, लेकिन उन्होंने यजीद की बेअत कुबूल नहीं की और अपनी शहादत देकर इस्लाम को जिंदा कर दिया। इसी मंजर को याद कर जुलूस में शामिल अजादार या हुसैन या हुसैन कीं सदाएं बुलंद करते हुए चल रहे थे। जुलूस में अलमों की तादाद काफी थी, जो आज के जुलूस की रिवायत का हिस्सा है।
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इस हुसैनी काफिले के अजाखाना दानिशमंदान पहुंचने पर अजादारों ने जंजीर का मातम कर खुद लहुलूहान कर लिया। इसके बाद जुलूस के दौरान अजाखाना बगला, शफातपोता, गुजरी, दरबारे कलां, सट्टी व हक्कानी में जंजीरों से मातम बरपा किया। जुलूस अपने तयशुदा रास्तों से गुजरते हुए देर शाम अजाखाना चांदसूरज पहुंचकर संपन्न हुआ। जुलूस में शामिल अजादारों के लिए कई स्थानों पर सबील व चाय का एहतमाम किया गया। भाजपा नेता अतुल कुमार जैन भी गमे हुसैन में शरीक हुए।
कर्बला का वाक्या सुन अजादारों की आंखें हुईं नम
मोहल्ला मुल्लाना जामा मस्जिद के चौराहे पर जिला प्रशासन के अफसरों ने जुलूस को देखा। जुलूस में डीएम की ओर से अंजुमन तहफ्फुजे अजादारी के नामित कमेटी के सदस्य लियाकत अली, बाकर रजा, नदीम नकवी, कासिम जैदी के साथ जुलूस का संचालन कर रहे अंजुमन रजाकाराने हुसैनी के रजाकारान काईद गुलाम सज्जाद, इमदाद आब्दी, जनरल सेक्रेटरी खुर्शीद हैदर जैदी, मो. तकी, जाफर रजा, काशिफ जैदी आदि मौजूद रहे। उधर, देर रात तक अजाखानों में मजलिसों का दौर चला। उलमा ने वाक्या-ए-कर्बला बयां किया, जिसे सुनकर अजादारों की आंखें नम हो गईं।
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