सभी सुविधाओं से लैस लैब के भवन का निर्माण कार्य धीमी गति से चलने के कारण मरीजों को डेढ़ महीने और इंतजार करना पड़ेगा। अभी प्रथम तल पर ही लिंटर डाला गया है। इसके बाद ऊपरी मंजिल के कमरों पर लिंटर डाला जाएगा। अन्य निर्माण किए जाएंगे।
सीएचसी की आवासीय कॉलोनी में टीकाकरण कक्ष के पास आधुनिक व सुविधाओं से लैस लैब का भवन बन रहा है। इसका निर्माण अप्रैल में शुरू हुआ था। दो मंजिला भवन के निचले तल पर बड़ा हॉल बनाया गया है। इस पर चार दिन पहले ही लिंटर डाला गया है। ऊपरी मंजिल पर चार कमरे बनाए जाएंगे। निचले तल पर हॉल में जांच कराने के साथ ही मरीजों की रिपोर्ट की टेस्टिंग की जाएगी। इसके साथ ही रिसेप्शन और सैंपल कलेक्शन कक्ष बनाया जाएगा।
हॉल में ही मरीजों की जांच करने के बाद उनकी रिपोर्ट तैयार करने के लिए कंप्यूटर रखा जाएगा मगर लैब के भवन का निर्माण कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है। साढ़े तीन महीने में प्रथम तल का लिंटर डाले जाने का ही काम हुआ है। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की निगरानी सही से नहीं होने के कारण ठेकेदार व कार्यदायी संस्था निर्माण कार्य को तेजी से नहीं करा रहे हैं। इससे लग रहा है कि यह अगस्त में भी संचालित नहीं हो सकती। कार्यदायी संस्था के अवर अभियंता रवि कुमार ने बताया कि मुहर्रम के कारण कई दिन निर्माण कार्य बंद रहा था। कोशिश है 31 अगस्त तक निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
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लैब के लिए चार महीने पूर्व आ गए थे उपकरण
लैब में जो जरूरी मशीन व उपकरण की जरूरत होती है, वह मार्च और अप्रैल में ही आ गए थे। मगर भवन निर्माण कार्य में देरी के कारण वह धूल फांक रहे हैं। सीएचसी प्रभारी डॉ.योगेंद्र सिंह ने बताया कि सब सुविधाओं से लैस बन रही लैब के लिए सेल काउंटर पहले ही आ गया है। जो हीमोग्लोबीन, टीएलसी, डीएलसी बताने के साथ ही प्लेटलेट्स की गणना का काम करता है। इसके अलावा कैल्शियम, मैग्नीशियम आदि बताने के लिए बायो केमिस्ट्री एनालाइजर मशीन आ गई है। ईएसआर की जांच समेत कई अन्य मशीन भी आ गई हैं। लैब के भूतल पर आशाओं, आंगनबाड़ी वर्कर्स के भुगतान के लिए बिल बाउचर बनेंगे। उनको भी भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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जांच के लिए मरीजों को लगाने पड़ रहे ऊपर-नीचे चक्कर
अभी तक सीएचसी के ऊपरी मंजिल पर बने कमरे में लैब चल रही है। उसका कमरा छोटा है जिसमें जांच की सभी मशीन और उपकरण रखने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं है। मरीजों की जांच की कुछ मशीन व उपकरण 6 नंबर व 8 नंबर कमरे में रखे हैं। इस कारण ऊपरी तल पर बनी लैब में सीवीसी, एलएफटी, एफटी, एचवीए-1 सी की जांच होती है। इसके अलावा एचआईवी, सिफलिफ, महिलाओं की जांच, हेपेटाइटिस बी और सी की जांच भी ऊपरी तल पर बनी लैब में की जाती है। नीचे के 6 और 8 नंबर कमरे में बनी लैब में बुखार, खांसी, डेंगू व मलेरिया की जांच की जाती है। यदि एक मरीज को डेंगू, मलेरिया के साथ ही यूरिन की जांच करानी पड़े तो उसे पहले नीचे बने 6 व 8 नंबर में जाना पड़ता है। बाद में यूरिन की जांच के लिए ऊपरी तल पर 32 नंबर कमरे में। इस तरह सीएचसी में जांच कराने के लिए आने वाले मरीजों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आवासीय कॉलोनी में सब सुविधाओं से लैस लैब शुरू हो जाने पर मरीजों की परेशानी दूर होगी।