जिले में अन्य स्थानों की बात तो छोड़िये, यहां तो जिला पंचायत अध्यक्ष के गांव का पानी ही दूषित है। घर तो घर, सरकारी हैंडपंप का पानी भी पीने योग्य नहीं है। प्राइमरी स्कूल के बच्चे प्रदूषित पानी का सेवन कर रहे थे, जबकि ग्रामीण भी उसको पी रहे थे।
ये चौंकाने वाली सच्चाई आठ इंडिया मार्का हैंडपंपों से भरे गए पानी के नमूनों की जांच में सामने आई है। दो हैंडपंप का पानी प्रदूषित पाया गया है, जिसमें फ्लोराइड व हार्डनेस की मात्रा अधिक मिली है। इसके अलावा उसका रंग भी हल्का पीला मिला है। मसले को गंभीरता से लेते हुए जल निगम के अधिकारियों ने हैंडपंप पर लाल निशान लगाकर अन्य के सैंपल भरकर जांच को भेजे हैं।
समाजवादी पार्टी से जिला पंचायत अध्यक्ष रेनू चौधरी व पूर्व मंत्री चौधरी चंद्रपाल सिंह का गांव पपसरा यूं तो राजनीतिक चर्चाओं में शुमार रहता है, लेकिन इस बार मसला राजनीति का नहीं है बल्कि लोगों की सेहत से जुड़ा है। इसलिए और भी गंभीर हो गया है। ग्रामीणों के घरों में लगे हैंडपंप तो पहले से ही पानी खराब उगल रहे थे, लेकिन अब सरकारी हैंडपंपों की स्थिति भी सोचने को मजबूर कर रही है। यहां बता दें कि गांव में कैंसर से पीड़ित कई लोगों की मौत हो चुकी थी। हर शख्स की जुबां पर बस यही बात थी कि नलों का पानी ठीक नहीं है।
लगातार हो रही मौतों और उजड़ते परिवारों के मामले को जिला पंचायत अध्यक्ष ने बेहद गंभीरता से लिया। उन्होंने गांव के पानी के सैंपल भरकर जांच के निर्देश जल निगम के अफसरों को दिए। कुछ दिन पहले निगम के अधिकारियों ने प्राइमरी स्कूल के अलावा आठ जगह स्थापित इंडिया मार्का हैंडपंपों के पानी के नमूने परीक्षण के लिए भरे। विभागीय लैब में जब उनकी जांच हुई तो अधिकारी भी हैरत में पड़ गए। सूत्रों मानें तो आठ में से दो हैंडपंप का पानी प्रदूषित मिला है।
एक हैंडपंप पृथ्वी सिंह के घर के पास लगा है तो दूसरा प्राइमरी स्कूल में। कहा जाए तो ग्रामीण व स्कूली बच्चे प्रदूषित जल का सेवन कर रहे थे। अधिकारियों के मुताबिक दोनों हैंडपंपों के पानी में हार्डनेस, गंदलापन, हल्का पीला रंग व फ्लोराइड की अधिकता पाई गई है। इसलिए उन पर लाल रंग का निशान लगाया गया है और ग्रामीणों को भी पानी का इस्तेमाल नहीं करने की सलाह दी गई है।
रिपोर्ट की जानकारी अभी नहीं मिली है। अगर ऐसा है तो जिला पंचायत बोर्ड की मीटिंग में इस मुद्दे को प्रमुखता के साथ रखा जाएगा। प्रस्ताव पास कर हैंडपंपांे को रीबोर करवाया जाएगा। बोरिंग और गहरे कराए जाएंगे। रेनू चौधरी, जिला पंचायत अध्यक्ष
चार फैक्ट्रियों में से निर्मल फाइबर के पानी का सैंपल जांच में असंतोषजनक मिला हैं। पप्सरा गांव में आठ में से दो नमूने परीक्षण में सही नहीं मिले हैं। हैंडपंपों के पानी में फ्लोराइड की मात्रा 7 एमजी/एल है, जबकि यह अधिकतम एक होनी चाहिए। हार्डनेस 300 एमजी/एल से ज्यादा है। कुछ अन्य हैंडपंप के पानी भी जांच को लखनऊ भिजवाए गए हैं। वहां की रिपोर्ट अभी आई नहीं है। रवि कुमार, जेई/प्रभारी जल परीक्षण लैब जलनिगम