दिन में गर्मी और रात में ठंडे मौसम से लोग बीमार पड़ रहे हैं। बुखार लोगों की जान ले रहा है। सोमवार को आदमपुर क्षेत्र के गांव सुल्तानपुर भीमा निवासी मुरारी (65) की बुखार से मौत हो गई। मुरारी को पिछले पांच दिनों से बुखार आ रहा था। जिले में अब तक चार लोगों की बुखार से मौत हो चुकी हैं। वहीं, डेंगू-मलेरिया का कहर भी लगातार बढ़ता जा रहा है। अब तक जिले में डेंगू और मलेरिया के पांच-पांच मरीज मिल चुके हैं।
सोमवार को भी बड़ी संख्या में मरीज अस्पताल में इलाज कराने के लिए पहुंचे। आलम यह रहा है कि जिला अस्पताल का वार्ड फुल हो गया और एक बेड पर दो-दो मरीजों का इलाज किया गया। अस्पताल में पहुंच रहे मरीजों में से हर चौथा मरीज बुखार से पीड़ित हैं। आदमपुर क्षेत्र के गांव सुल्तानपुर भीमा निवासी मजदूर मुरारी पिछले पांच दिन से बुखार से पीड़ित थे। उनका गांव के ही निजी चिकित्सक के यहां इलाज चल रहा था। रविवार को ज्यादा तबीयत खराब होने पर परिजन मुरारी को ढबारसी में स्थित निजी चिकित्सक के यहां ले गए, जहां चिकित्सक ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। परिजन शव को गांव ले गए और अंतिम संस्कार कर दिया गया। मृतक ने अपने पीछे चार बेटे व दो बेटियां छोड़ी हैं। सीएचसी प्रभारी डॉ. ध्रुवेंद्र सिंह का कहना है कि ग्रामीण की बुखार से मौत की कोई जानकारी नहीं है। बुखार से पीड़ित मुरारी नाम का कोई व्यक्ति सीएचसी नहीं पहुंचा। वहीं, हसनपुर में छह दिन पूर्व अधिवक्ता की मौत भी बुखार से हो गई थी। जिलेभर में अब तक बुखार से चार मौत हो चुकी हैं।
वार्ड फुल, एक बेड पर दो-दो मरीजों का इलाज
अमरोहा।
रविवार की छुट्टी के बाद सोमवार को अस्पताल के खुलते ही मरीजों की भीड़ रही। सुबह सात बजे से ही मरीज और तीमारदार पर्चा बनवाने के लिए लाइन में लग गए।
जिला अस्पताल में 2412 मरीज ओपीडी में पहुंचे। इसमें महिला विंग के मरीज भी शामिल हैं। सबसे ज्यादा बुखार के 560 मरीज थे। जिला अस्पताल के पांच जनरल वार्ड में 30 बेड है, जबकि उन पर 39 मरीज का इलाज कराया जा रहा है। ऐसे कई ऐसे बेड थे, जिन पर दो-दो मरीज भर्ती थे। डॉक्टरों की सलाह के बाद चार डेंगू और 67 मलेरिया आशंकित मरीजों की जांच कराई गई। हालांकि, अच्छी बात यह रही कि सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई।
दोपहर करीब दो बजे तक अस्पताल में मरीजों की भीड़ रही। डॉक्टर कक्ष के बाहर लाइन में लगे मरीज अपनी बारी का इंतजार करते दिखे। करीब एक से डेढ़ घंटे में मरीज का नंबर आया। यह स्थिति पर्चा बनवाने से लेकर डॉक्टरों के कक्ष के बाहर तक की थी। दवा लेने के लिए भी मारामारी के हालात बने रहे। पैथोलॉजी लैब पर जांच करने के लिए भी भीड़ रही। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. चरन सिंह ने बताया कि मौसम में बदलाव के चलते इन दोनों मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। सबसे ज्यादा बुखार के मरीज आ रहे हैं।
अब तक डेंगू और मलेरिया के मिल चुके हैं पांच-पांच मरीज
बुखार के साथ-साथ डेंगू और मलेरिया पैर पसारने लगा है। जिले में अब तक पांच लोगों में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। वहीं, पांच ही लोगों मलेरिया के पीड़ित मिले हैं। हालांकि, इलाज के बाद वह स्वस्थ हो चुके हैं। लेकिन, आशंकित मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
बच्चों को पहनाएं पूरी आस्तीन के कपड़े
सीएमओ डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि डेंगू से बचाव के लिए जरूरी है कि शरीर को पूरी तरह से कवर करके रखें। डेंगू के मच्छर दिन के समय में ज्यादा काटते हैं, ऐसे में इनसे बचाव के लिए बच्चों को पूरी आस्तीन के कपड़े पहनाएं। इसके अलावा स्कूल में साफ-सफाई और मच्छरों के काटने से बचाव के लिए भी उपाय किया जाना चाहिए। मच्छरों को मारने वाली दवाओं का छिड़काव किया जाना चाहिए।
डेंगू के लक्षणों को न करें अनदेखा
डेंगू संक्रमण की स्थिति के गंभीर रूप लेने का जोखिम तभी होता है। जब इसके लक्षणों की समय पर पहचान न हो पाए और रोग का इलाज न मिले। इसलिए जरूरी है कि बच्चों को अगर तीन-चार दिनों से अधिक समय से तेज बुखार के साथ शरीर में दर्द, त्वचा पर दाने, पेट की समस्याएं और उल्टी जैसी दिक्कत हो रही है तो इस बारे में समय रहते डॉक्टर से मिलकर उपचार किया जाना चाहिए। समय पर लक्षणों की पहचान करके रोग को गंभीर स्थिति में पहुंचने से बचाया जा सकता है।