खेत में बिछी धान की फसल। (फाइल फोटो)
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अमरोहा में बारिश थमने के बाद मंगलवार को कृषि उपनिदेशक और जिला कृषि अधिकारी ने गांव -गांव जाकर सर्वे किया। धान व अन्य फसलों को देखा। विभागीय अधिकारियों का दावा है कि जिले में धान समेत अन्य फसलों को 30 फीसदी नुकसान हुआ है। इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। साथ ही फसल बीमा कंपनियों को निर्देशित किया गया है कि वह जिन किसानों का बीमा है और उनका नुकसान हुआ है तो उन्हें तत्काल मुआवजा दिया जाए।
पिछले छह अक्तूबर की सुबह से शुरू हुआ बारिश का सिलसिला सोमवार की रात तक लगातार जारी रहा। मंगलवार को मौसम में बदलाव दिखा। धूप खिली लेकनि पांच दिन की बेमौसम बारिश ने किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया। बारिश के साथ तेज हवा चलने से सैकड़ों बीघा खड़ी धान की फसल जमीन में बिछ गई है।
बारिश के पानी से खेत लबालब हो गए हैं। जमीन में गिरा धान बारिश के पानी में ऊपर तैरता नजर आ रहा है। कटा हुआ धान भी बारिश में भीग कर बर्बाद हो गया। किसानों ने फसलों को भारी नुकसान होने का दावा किया था। जुन जुलाई में सूखे की मार झेलने वाले किसानों पर अब दोहरी मार पड़ी। वहीं किसानों ने नुकसान का सर्वे कराकर मुआवजा दिए जाने की मांग की।
इसी क्रम में मंगलवार को कृषि उप निदेशक डॉ राम प्रवेश और जिला कृषि अधिकार राजीव कुमार ने जोया ब्लाक क्षेत्र के गांव कालाखेड़ा, सरकड़ी और मकनपुर गांव के जंगल में पहुंचकर फसलों को देखा। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि जो फसल पूरी तरह गिर गई हैं, उनमें 30 फीसदी तक नुकसान है। जबकि जो फसल खड़ी है और उसका कुछ हिस्सा गिरा है ऐसे खेतों में नुकसान कम हैं। उन्होंने बताया कि ओवर ऑल जिले में धान समेत अन्य फसलों को दस से 30 फीसदी तक नुकसान है। इसकी रिपोर्ट तैयार कराकर शासन को भेजी जाएगी। साथ ही फसल बीमा कंपनियों को निर्देश दिए हैं कि वह जल्द से जल्द सर्वे कर किसानों को मुआवजा उपलब्ध कराएं।