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सफाई के नाम पर 55 लाख का हुआ बंदरबाट, ग्रामीण गंदगी से परेशान

सार

एक ओर प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर वर्ष 2014 से स्वच्छता पखवाड़ा चलाया जा रहा है लेकिन यह अभियान कागजों तक सिमटा हुआ है।सुधार की आवश्यकता है।डॉक्टर एनएस भारती, निवासी पतेई खालसा सड़क बहुत दिनों से टूटी पड़ी है।कुछ ग्रामीणों ने अपने घरों का पानी यहां सड़कों पर छोड़ रखा है।
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विस्तार
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अमरोहा। एक ओर प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर वर्ष 2014 से स्वच्छता पखवाड़ा चलाया जा रहा है लेकिन यह अभियान कागजों तक सिमटा हुआ है। इसका उदाहरण है जोया ब्लॉक के नौ गांव है, जहां लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी गंदगी का यह आलम है कि लोग दुर्गंध के बीच से गुजरना अपनी नियति मान बैठे हैं।
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जोया ब्लॉक के डिडौली, पतेई खालसा, फैजगंज, ककराली, कमालपुर, भवालपुर खय्या, शेखूपुर, नूरी मुबारकपुर और पूरनपुर गांवों में सड़क किनारे कूड़े के ढेर लगे हैं। इसमें से उठ रही दुर्गंध से लोगों का उधर से निकलना तक मुश्किल हो गया है। डिडौली में चार और अन्य सभी गांवों में एक-एक सफाईकर्मी तैनात हैं लेकिन गांवों में कभी नहीं आते। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों तक से गुहार लगाई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके चलते ग्रामीणों में संक्रामक बीमारियों के पनपने की आशंका है।
डिडौली गांव में चार सफाई क र्मी तैनात, सफाई शून्य
20 हजार की आबादी वाले डिडौली गांव में चार सफाईकर्मी तैनात हैं लेकिन सफाई करने कभी नहीं आते। इसकी वजह से सड़कों पर कूड़े का ढेर जमा हो गया है। पानी जमा होने से वहां दुर्गंध फैल रही है जिससे लोगों का उधर से गुजरना मुश्किल हो गया है। यहां पर पेयजल, सफाई और बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए अलग से 55 लाख 75 हजार रुपये का बजट आया था, बावजूद इसके यहां पर गंदगी पसरी है। शिकायत के बाद भी अधिकारी तटस्थ बने हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यहां की सफाई व्यवस्था कागजों तक सिमटकर रह गई है।
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पतेई खालसा में संक्रामक बीमारियों की आशंका से ग्रामीण चिंतित
15 हजार आबादी वाले पतेई खालसा में केवल एक सफाई कर्मचारी तैनात है। यह कभी गांव में दिखाई नहीं देता। कूड़े से पटे होने से नालियां जाम हो गइ हैं जिससे पानी निकासी बंद है। तालाब में भी कूड़ भरा हुआ है। दुर्गंध से यहां संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका है। इससे ग्रामीण परेशान हैं।
कमोवेश यही स्थिति फ़ैजगंज, ककराली, कमालपुर, भवालपुर खय्या, शेखूपुर, नूरी मुबारकपुर, पूरनपुर आदि गांवों में भी बनी हुई है। फ़ैजगंज के वासियों का कहना है कि हमारे गांव में एक सफाई कर्मचारी है। वह भी बीमार हैं। सफाई नहीं होने से कमालपुर में आने जाने वाले मुख्य रास्तों पर पानी भरा रहता है। लोगों को आने जाने मे असुविधा होती है। खय्या में भी नालियां चोक पड़ी हैं। दूसरे गांवों के भी यही हालात बने हुए हैं।
बोले ग्रामीण
मुख्यमंत्री का नेतृत्व करने वाली टीम ने डिडौली गांव को प्राथमिकता देते हुए मॉडल गांव चिह्नित किया और निधि से अलग विकास कार्यों के लिए 55 लाख 75 हजार रुपये का बजट दिया। लेकिन प्रशासनिक व्यवस्था ने पूरे धन का बंदरबांट कर दिया। गांव के अंदर कोई विकास कार्य नहीं हुआ है। मनोज कुमार, वार्ड मेंबर
दलित समाज के मोहल्ले में यहां पर कूड़े के ढेर लगे हैं। यहां भेदभाव से काम किया जा रहा है। बच्चों को स्कूल जाने के लिए गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है। यहां पर एक इंटर कॉलेज है। जिसमें बच्चे जाते हैं। बीमारियों का प्रकोप है। नाले-नालियां पूर्ण रूप से बंद पड़े हुए हैं। सुधार की आवश्यकता है।
डॉक्टर एनएस भारती, निवासी पतेई खालसा
सड़क बहुत दिनों से टूटी पड़ी है। सड़क पर बारिश में जगह-जगह पानी भर जाता है। कुछ ग्रामीणों ने अपने घरों का पानी यहां सड़कों पर छोड़ रखा है। उसके लिए नाली निर्माण होना आवश्यक है। गंदगी से रहना मुश्किल हो गया है। साफ सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है।
मौहम्मद यामिन, निवासी डिडौली
डिडौली गांव काफी बड़ा है। जिसकी वजह से यहां ये स्थिति बनी हुई है। हालांकि साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखा जाता है। कुछ दिनों से लगातार बारिश की वजह से यहां गंदगी की समस्या उत्पन्न हुई है। घरों से कूड़ा भी उठाया जाता है। समय-समय पर नालियों की भी सफाई कराई जाती है।
महिपाल सिंह, ग्राम प्रधान, डिडौली
शासन की तरफ से 21 ग्राम पंचायतों के विकास के लिए अतिरिक्त बजट आए हैं लेकिन काम अभी शुरू नहीं कराया जा सका है। शीघ्र ही काम शुरू कराकर गांवों को विकास की गति दी जाएगी। - विमल कुमार एडीपीआरओ, अमरोहा
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