सरकार और प्रशासन सरकारी अस्पतालों में उपचार और दवा मुफ्त दवा देने का दावा करती है। आर्थिक रूप से कमजोर मरीज भी जिला अस्पताल में इसलिए जाते हैं, ताकि उन्हें निशुल्क उपचार मिल सकें। लेकिन, हड्डी का ऑपरेशन कराने के लिए मरीजों को निजी अस्पताल की तरह ही रकम खर्च करने पड़ रही है। ऑपरेशन में लगने वाले उपकरण और कुछ दवाइयां मरीजों या उनके तीमारदारों को बाहर से खरीदनी पड़ती है। इन सब पर करीब 12 से 20 हजार रुपये खर्च होते हैं।
जिला अस्पताल में रोजाना चार से पांच मरीज अपना हड्डी से संबंधित ऑपरेशन कराने पहुंचते हैं, ताकि निजी अस्पताल में उन्हें माटी रकम खर्च न करनी पड़े और उनका निशुल्क उपचार हो सके। लेकिन, सरकारी अस्पताल में भी सिर्फ ओटी और बेड ही मरीज निशुल्क मिलेगा। इसके अलावा ऑपरेशन से जुड़े उपकरण और सामान उन्हें निजी मेडिकल स्टोर से ही खरीदने होंगे। जबकि, सरकार जिला अस्पताल सहित अन्य सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाली सारी सुविधाएं मुफ्त देने का दावा करती हैं। इसके बावजूद भी मरीजों को टांका लगाने के लिए सूचर और रुई, पट्टी से लेकर दवाएं तक बाहर से खरीदनी पड़ती हैं।
मरीजों ने बताया कि जब अस्पताल में भर्ती हुए थे, तो एक्सरे समेत कई जांच तो निशुल्क करा दी गईं। इसके बाद वहां पर उपचार कर रहे चिकित्सक ने कुछ सामान बाहरी मेडिकल स्टोर से लाने के लिए हाथ में पर्चा थमा दिया। इसके बाद ऑपरेशन कराने के लिए रुपयों की व्यवस्था की और दो दिन बाद सामान खरीदकर लाकर चिकित्सकों को दिया।
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गरीब अधिक परेशान
गरीब मजदूर व्यक्ति को लगता है कि सरकारी अस्पताल में निशुल्क हड्डी का ऑपरेशन हो सकता है। लेकिन, गरीब व्यक्ति को पैर पर प्लास्टर और ऑपरेशन कराने के लिए 12 से 20 हजार रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। जिससे गरीब व्यक्ति की जेब काफी बोझ बढ़ रहा है। कुछ गरीब तो कर्ज पर लेकर सरकारी अस्पताल में हड्डी का ऑपरेशन कराने के लिए पहुंचते हैं।
हर माह होते हैं करीब 60 ऑपरेशन
जिला अस्पताल में एक माह में करीब 60 मरीजों के हड्डी संबंधित ऑपरेशन हो जाते हैं। जिसमें कई मरीज ऐसे भी होते हैं, जो आयुष्मान कार्ड के माध्यम से ऑपरेशन करा लेते हैं। बाकी मरीजों को बाहरी स्टोर से ही सामान खरीदकर लाना पड़ता है।
ऑपरेशन में इन चीजें पड़ती है जरूरत
रॉड, बेहोशी की दवा, सूचर (टांका लगाने वाला धागा) तक बाहर से लाना पड़ रहा है। यहीं नहीं ड्रेसिंग के लिए रुई और पट्टी तक मरीजों को खरीद कर लानी पड़ रही हैं।
बोले मरीज
- गिरने के कारण पैर घुटने के पास हड्डी टूट गई थी। ऑपरेशन के लिए जिला अस्पताल में पहुंचे। जहां पर बाहरी अस्पताल से सामान लाने के लिए पर्चा दे दिया गया। बाहरी स्टोर से सामान खरीदकर लाकर दिया, तब जाकर ऑपरेशन हो पाया। - रहीश, अमरोहा
- मेरी पत्नी कविता के कुल्हे में दिक्कत आ गई थी। जिसका ऑपरेशन जिला अस्पताल में कराया गया है। ऑपरेशन से पहले 12 हजार रुपये की दवाईं समेत ऑपरेशन संबंधित उपकरण बाहरी स्टोर से खरीदकर लाने पड़े। - अमरपाल सिंह, पपसरा
- जिला अस्पताल में कुछ सामान उपलब्ध है, बाकी नेलिंग (रॉड) डालने के लिए बाहर से मंगाना पड़ता है। जिसका बिल भी दिया जाता है। यदि अधिक गरीब व्यक्ति है, तो डीएम को पत्र भेजकर निशुल्क व्यवस्था के लिए रेड क्रॉस सोसाइटी से उपचार करा दिया जाता है। इसके अलावा आयुष्मान कार्ड का भी व्यक्ति लाभ ले सकता है। - अश्वनी भंडारी, कार्यवाहक सीएमएस