फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

टमाटर खत्म हो गया तब आया भाव में उछाल, किसान बेहाल

विज्ञापन
विज्ञापन
अमरोहा। पंद्रह दिन पहले तक जब खेतों में टमाटर की भरमार थी तो किसानों को दो से पांच रुपये किलो की कीमत मिली। अब जब टमाटर खत्म होने को हैं तो भाव 25 से 30 रुपये हो गया है। जबकि अब खेतों में दस फीसदी ही टमाटर बचा है। हालांकि दामों में उछाल के बाद भी अमरोहा के टमाटर को बंगलूरू जैसा भाव नहीं मिल रहा है। वहां 46 रुपये किलो थोक भाव है। इससे किसानों में निराशा है।
विज्ञापन

जिले में दो से तीन हजार हेक्टेअर भूमि पर टमाटर की खेती होती है। अमरोहा के टमाटर की सप्लाई दिल्ली, बंगलूरू, महाराष्ट्र समेत दूसरे प्रदेशों और जिलों में होती है। लेकिन इस बार टमाटर के सीजन की शुरुआत होने से पहले लॉकडाउन लग गया। ऐसे में अमरोहा से टमाटर की सप्लाई बाहर कम ही हो पाई। किसानों को अपना टमाटर दो से पांच रुपये में बेचना पड़ा। करीब नब्बे फीसदी टमाटर खत्म हो गए है। अब सिर्फ दस फीसदी टमाटर खेतों में बचे हैं। खत्म होने के समय टमाटर के दामों में उछाल आया है। थोक में अमरेाहा के टमाटर 25 से 30 रुपये में बिक रहा है। जबकि इस समय बंगलूरू से आए टमाटर की कीमत 1200 रुपये क्रेट है। जो 46 रुपये किलो बैठ रहा है। दामों के उछाल के बाद भी अमरोहा के टमाटर को बंगलूरू जैसा भाव नहीं मिल रहा है। जिसे लेकर किसान मायूस हैं।
- जिले में टमाटर की खेप बंगलूरू से आने लगी है। क्वालिटी सही है। इसे लोग खूब पसंद कर रहे हैं। फिलहाल 1200 रुपये क्रेट बिक रही है। एक क्रेट का 26 किलो वजन है। ऐसे में एक किलो टमाटर की कीमत 46 रुपये हो रही है। - अलीम अहमद, आढ़ती, टमाटर।
विज्ञापन

- जिले के टमाटर बहुत कम मात्रा में बचे हैं। व्यापारियों के पास स्टोर के टमाटर हैं। फिलहाल 25 से 30 रुपये किलो बिक रही है। बाहर के टमाटर की क्वालिटी बेहतर नहीं है।
- राजेंद्र सैनी, आढ़ती, टमाटर
टमाटर के दामों में उछाल, किसानों के लिए जले पर नमक जैसा
रजबपुर। जिले में टमाटर की खेती का 60 से 75 फीसदी हिस्सा गांव सुदनपुर, हैबतपुर और सलारपुर में होता है। आज टमाटर के दाम लगभग एक हजार रुपये कैरेट हो गया है, जोकि कुछ दिन पहले 100 रुपये था। 90 फरसदी किसानों की टमाटर की फसल समाप्त हो चुकी है। जबकि आज टमाटर के रेट आसमान छू रहे है। जो किसानों के लिए जले पर नमक जैसा है। जब किसान के पास फसल आती है, तब रेट कम और जब समाप्ति होती है तो रेट बढ़ जाते है।
- जब खेतों में टमाटर था, तब रेट 100 रुपये क्रेट दाम था। अब जबकि टमाटर की फसल समाप्त हो चुकी है तो रेट एक हजार रुपये पहुंच गया है। लॉकडाउन में टमाटर बाहर नहीं जाने से किसानों को मंदा रेट मिला है, अब तो किसान लूटा महसूस कर रहा है। - मुकेश, किसान
- जब माल नहीं है तो रेट बढ़ने हमारे किस काम है। लॉकडाउन के दौरान किसान औने पौने दामों में अपना टमाटर बेच चुके हैं। किसान तो मंदे में ही फसल को लुटा चुके है। अब दाम दो हजार हो जाए तो उन्हें क्या फायदा। - कुलदीप, किसान
- अब चाहे कीमत हजार हो या दो हजार रुपये, अब तो यह किसान के जले पर नमक समान है। किसानों को लाभ तो दूर टमाटर की फसल में मेहनत के दाम भी नहीं मिले है। इस बार टमाटर घाटे का सौदा साबित हुआ। - जुबैर अली, किसान
- आज टमाटर की फसल लगभग समाप्त हो गई है, जब फसल थी तब सौ रुपये अब नहीं है तो एक हजार रुपये कीमत है। मंदी का कारण लॉकडाउन रहा। इसके चलते किसानों को नुकसान उठाना पड़ा। - वीरपाल, किसान
दाम सही नहीं मिलने पर किसानों ने खींच लिया हाथ
रजबपुर। लॉकडाउन में सही कीमत नहीं मिलने पर किसानों ने टमाटर की देखभाल से अपने हाथ खींच लिए। बीमारियों से बचाव के लिए दवाओं का छिड़काव नहीं किया। इससे टमाटर के पौधे पर मकड़ी रोग लग गया। जिससे टमाटर खराब हो गया और टमाटर की फसल जल्द समाप्त हो गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें