गजरौला। राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन (राकिमसं) ने शनिवार को शहवाजपुर माफी और नगला माफी में बैठकें कीं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र सिंह ने कहा कि उच्च न्यायालय ने गन्ना सत्र 1996-97 से 2025-26 तक विलंबित भुगतान पर ब्याज देने का आदेश दिया है। किसान डीसीओ कार्यालयों पर धरना देकर ब्याज का हिसाब मांग रहे हैं, लेकिन अधिकारी मौन हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक दल किसानों के बजाय चीनी मिलों के साथ हैं। सपा सरकार ने 2016 में शासनादेश जारी कर किसानों का 2000 करोड़ रुपये माफ कर दिया था, जिसे वीएम सिंह ने याचिका दायर कर खारिज कराया। उपेंद्र सिंह के अनुसार, 16 जुलाई को उच्च न्यायालय ने ब्याज देने का आदेश दिया, जिसके खिलाफ भाजपा सरकार सुप्रीम कोर्ट गई। छह अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज कर उच्च न्यायालय के आदेश को उचित बताया। वहीं, 15 अक्तूबर को बसपा के सतीश चंद्र मिश्रा ने किसानों के विरोध में उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। उन्होंने किसानों से विरोधियों के बहिष्कार का आह्वान किया।
बैठक में राजवीर सिंह, उमेश सिंह, नितीश पंघाल, राजपाल सिंह, मास्टर समरपाल सिंह, धर्मपाल सिंह, डॉ. समरपाल सिंह और पुरुषोतम सिंह मौजूद रहे।
ब्याज दिलाने की मांग को लेकर धरना जारी
मंडी धनौरा। राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के कार्यकर्ताओं का देरी से भुगतान करने पर चीनी मिलों से वर्ष 1996 से ब्याज दिलाने की मांग को लेकर जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय पर धरना जारी है। जिला प्रभारी राजवीर सिंह ने कहा कि चीनी मिल मालिक कोर्ट के आदेश को भी मानने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि किसान साल 1996 से ब्याज लेकर रहेंगे। यह हमारा हक है। इस मौके पर दिगराज सिंह, डालचंद, कपिल कुमार, योगपाल सिंह आदि मौजूद थे। संवाद