तिगरी गंगा घाट पर स्नान करने को उमड़े श्रद्धालु। अमर उजाला
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यहां आस्था है। उमंग है, उल्लास है। संस्कृति के विभिन्न रंग हैं। पारंपरिकता है तो आधुनिकता की बहार भी है। गरीब और अमीर सभी एक तट पर एक उद्देश्य के लिए साथ हैं। कहीं ढोल की थाप लोग झूम रहे हैं तो कहीं जादू देख हैरान हैं। मिक्की माउस पर लुब्ध बच्चे हैं तो दो जून की रोटी के लिए तिजारत कर रहा बचपन भी है। मौत के कुएं में करतब दिखा रहे कलाकार हैं तो पिकनिक का पूरा माहौल है। गंगा स्नान कर भजन कीर्तन कर रहे कल्पवासियों का मेला भी है। ये तिगरी मेला है।
तिगरी मेले के लिए श्रद्धालुओं का जन सैलाब खूब उमड़ रहा है। दूूर-दूर के इलाकों से श्रद्धालु तिगरी की ओर चले आ रहे हैं। ट्रैक्टर-ट्रालियाें का तांता लगा हुआ है। शनिवार श्रद्धालुओं का ट्रैक्टर ट्राली, टाटा मैजिक, बैल गाड़ी, भैंसा-बुग्गी, जुगाड़ू और अन्य वाहनों से तिगरी धाम पर पहुंचना जारी रहा।
अनुमान लगाया जा रहा है कि तकरीबन पांच लाख श्रद्धालु गंगा तट पर पहुंचे होंगे। पूरा तट तंबुओं के शहर में तब्दील हो चुका है। रोजाना मेले की रंगत बढ़ती जा रही है। बाजारों में दुकानें सजकर तैयार हैं। जमकर खरीदारी की जा रही है।
इससे पहले भोर से लेकर सूर्यास्त तक श्रद्धालुओं का जमघट गंगा घाट पर लगा रहा। लोगों ने विधि-विधान से पूजा अर्चना की और मां के जयकारे लगाए।