अमरोहा। जैन समाज के दशलक्षण पर्व के छठवें दिन रविवार को जैन मंदिर कोट में उत्तम तप धर्म की आराधना श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ की गई। सुबह मंदिर में जिनेंद्र भगवान का अभिषेक और रिद्धि मंत्रों के साथ भव्य शांतिधारा कराई गई। इसके बाद दशलक्षण मंडल विधान संपन्न हुआ। धार्मिक अनुष्ठानों में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और उत्तम तप धर्म के माध्यम से आत्मशुद्धि का संकल्प लिया।
सांगानेर से आए शास्त्री सौरभ जैन ने उत्तम तप धर्म की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दशलक्षण पर्व आत्मा की विशुद्धि और कर्मों की निर्जरा का पवित्र अवसर है। तप का अर्थ केवल शरीर को कष्ट देना या उपवास करना नहीं है, बल्कि इच्छाओं पर नियंत्रण रखते हुए आत्मा के निज स्वरूप में लीन होना है। उन्होंने कहा कि सम्यक ज्ञान, दर्शन और चरित्र के साथ बिना किसी सांसारिक फल अथवा यश की इच्छा से किया गया तप ही उत्तम तप धर्म का स्वरूप धारण करता है। तप मनुष्य को वासनाओं, कषायों और बाहरी आकर्षणों से दूर कर आत्मिक शुद्धि की ओर ले जाता है।
सायंकाल मंदिर में भगवान की आरती की गई। इसके बाद बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। कार्यक्रम में योगेश जैन, शरद कुमार जैन, सौरभ जैन, संजय जैन, शशिकांत जैन, पुनीत जैन, अरुण जैन, पवन जैन, शिवम जैन, वैभव जैन, रोहित जैन, शुभम जैन, रजनी जैन, नीरू जैन, दीपाली जैन, सपना जैन, बिना शाह, आंचल जैन, अंजू जैन मौजूद रहे।