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45 दिन के भीतर तीन बेटियों को मिला न्याय, दोषियों को सजा

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मिशन शक्ति मतलब बेटियों को न्याय। सरकार मिशन शक्ति के तहत कार्यक्रम आयोजित कर बेटियों को जागरूक कर रही है तो वहीं न्यायपालिका भी बेटियों के साथ वारदातों को लेकर गंभीर है। पिछले 45 दिन में अदालत से तीन बेटियों को न्याय मिला और दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा गया। जबकि पुलिस की एंटी रोमियो टीम में महिलाओं के साथ छेड़खानी व फब्तियां कसने वाले सैकड़ों मनचलों पर कार्रवाई की है। कई को जेल की हवा खानी पड़ी।
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एसपी विनीत जायसवाल ने बताया कि मिशन शक्ति के तहत जिले भर में कार्यक्रम आयोजित कर महिलाओं और छात्राओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। एंटी रोमियो टीम शहर-कस्बों और भीड़भाड़ वाले इलाकों और कालेजों के बाहर घूमने वाले मनचलों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। पिछले 45 दिन में सैकड़ों मनचलों को सबक सिखाया गया। इसमें कई के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जेल भेजने की कार्रवाई की गई। इसी क्रम में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विशेष पॉक्सो एक्ट प्रथम अवधेश कुमार सिंह की अदालत ने 20 जून को अपहरण कर सात साल की मासूम से छेड़खानी के दोषी को न्यायालय ने 29 दिन के भीतर पांच साल की सजा सुनाई है। साथ ही दोषी पर पंद्रह हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। इससे पहले न्यायालय ने 13 मई को तेरह दिन के भीतर पांच साल की मासूम से छेड़खानी के दोषी को साढ़े तीन साल की सजा सुनाई और साथ ही 23 हजार का जुर्माना लगाया था। जबकि मंगलवार को नाबालिग बेटी से दुष्कर्म के दोषी पिता को केवल छह दिन के भीतर सजा सुनाई और जुर्माना लगाया गया। एसपी के मुताबिक मिशन शक्ति के तहत बेटियों न्याय दिलाने के लिए पुलिस तत्पर है। इसक्रम में महिला संबंधित अपराधों में त्वरित कार्रवाई की जा रही है। जल्द से जल्द विवेचनाओं को पूरी कर अभियोजन के साथ संयुक्त कार्रवाई करते हुए दोषियों को सजा दिलाई जा रही है।
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