गजरौला। केंद्र और प्रदेश सरकार गांवों में शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए कई सारे वादे कर रही है। इसके लिए लाखों का बजट भी रखा गया है। योगी सरकार गांवों में नए स्कूल खोलने के बात कह रही है।
लेकिन अमरोहा जनपद के गजरौला ब्लॉक में शिक्षा की स्थिति ठीक इसके उलट है। ब्लॉक के दस गांवों में दस किलोमीटर के दायरे में हाईस्कूल स्तर का कोई विद्यालय ही नहीं है। इस वजह से हजारों विद्यार्थी कक्षा आठवीं के बाद आगे की पढ़ाई करने के लिए दस किलोमीटर की दूरी तय कर गजरौला जाकर पढ़ाई करने के लिए मजबूर हैं।
ग्रामीणों मुताबिक गजरौला ब्लॉक के कांकाठेर, मोहम्मदाबाद, ओसीता जगदेवपुर, कासमाबाद, बिजौरा, कुदैना, रखेड़ा, कबीरपुर, मोहरका पट्टी सहित दस गांवों में दस किमी के दायरे में कोई इंटर कॉलेज नहीं है। इससे इन गांवों के हजारों छात्र-छात्राएं आठवीं से आगे पढ़ाई करने के लिए दस किलोमीटर की दूरी तय गजरौला या ब्रजघाट जाने के लिए मजबूर हैं। कॉलेज नहीं होने के कारण अधिकांश छात्राएं आठवीं उत्तीर्ण कर घर बैठ जाती हैं।
बोले ग्रामीण
कक्षा दस की छात्रा हूं। गजरौला में दाखिला लिया है। रोजाना पढ़ने आती जाती हूं। गांव से करीब दस किमी दूर है। दूरी के कारण कॉलेज जाने में कभी कभार देर भी हो जाती है। दूरी के कारण ही गांव की और कोई छात्रा गजरौला नहीं जाती। उसके साथ आठवीं तक पढ़ाई करने वाली कई छात्राओं ने नजदीक कॉलेज नहीं होने के कारण आगे पढ़ने की हिम्मत नहीं दिखाई। सोमा, छात्रा, कांकाठेर
गांव के जूनियर हाईस्कूल से आठवीं तक पढ़ाई की। परिवार आगे पढ़ाने को तैयार था, लेकिन गांव में कोई इंटर कॉलेज नहीं होने के कारण यह समस्या सामने आई कि कहां पढ़ाया जाए। गजरौला भेजने के लिए परिवार तैयार नहीं हुआ। इस कारण वह आठवीं तक पढ़ाई कर घर बैठ गई। चंद्रकला, कांकाठेर
गांव निवासी रामकृपाल सिंह स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। राजनीतिक रूप से इससे बड़ी उपेक्षा और क्या होगी कि पूर्व कैबिनेट मंत्री रमाशंकर कौशिक के बाद किसी भी सांसद या विधायक ने कोई भी काम नहीं कराया। शिक्षा के क्षेत्र पिछड़ेपन का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि कांकाठेर ही नहीं बल्कि आसपास के दस गांवों में कोई इंटर कॉलेज नहीं है। प्रमोद उपाध्याय, पूर्व बीडीसी, कांकाठेर
आसपास किसी गांव में कोई इंटर कॉलेज नहीं है। खुंगावली में हाईस्कूल तक सरकारी कॉलेज है, लेकिन वह कीकर के जंगल में है। इसके अलावा उसे जाने के लिए हाईवे पार करना पड़ता है। हादसे का डर बना रहता है। गांव की छात्राओं को आठवीं के बाद आगे की पढ़ाई करने के लिए गजरौला, गढ़मुक्तेश्वर और ब्रजघाट के अलावा कहीं शिक्षण संस्थान नहीं हैं। इस कारण शिक्षा के क्षेत्र में गांव पिछड़ा हुआ है। सलाउद्दीन सैफी, कांकाठेर
गांव और आसपास कोई राजकीय इंटर कॉलेज नहीं होने के कारण पढ़ाई कर रहे छात्र-छात्राओं को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गांव की कम से कम 70 प्रतिशत बेटियां आठवीं तक पढ़ाई कर इस कारण घर बैठ गईं कि दस किमी गजरौला, ब्रजघाट उनके परिजन भेजने को तैयार नहीं हुए। शखावत हुसैन, कांकाठेर
बोले जनप्रतिनिधि
गांव में शिक्षा का स्तर बेहद नीचा है। आजादी से अब तक मुश्किल से 10 लड़कियों ने स्नातक की पढ़ाई की होगी। उनमें भी वह शामिल हैं, जिनके परिजनों ने या तो बाहर भेजकर शिक्षा दिलाई या खुद कॉलेज छोड़ने और लेने जाते हैं। उन्होंने क्षेत्रीय विधायक से गांव में राजकीय इंटर कॉलेज स्थापना की मांग रखी है। इसके लिए जमीन की कमी वह नहीं आने देंगी। अर्चना देवी, ग्राम प्रधान कांकाठेर
हमारी ग्राम पंचायत ही नहीं बल्कि आसपास किसी गांव में राजकीय इंटर कॉलेज नहीं है। जिसके कारण आठवीं उत्तीर्ण करने के बाद छात्र-छात्राओं को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है। गजरौला, हसनपुरया ब्रजघाट जाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं रहता। मजबूरी में छात्र-छात्राएं पढ़ाई छोड़ देते हैं। नदीम अहमद, ग्राम प्रधान बिजौरा
ब्लॉक क्षेत्र में दस किमी के दायरे में कोई इंटर कॉलेज नहीं है। जिससे विद्यार्थियों को पढ़ाई करने में परेशानी सामने आ रही हैं। खास कर छात्राओं को। उन्होंने कांकाठेर में इंटर कॉलेज की स्थापना के लिए शासन को पत्र लिखा है। हसनपुर विधायक के सामने भी मुद्दा उठाया है। मीनाक्षी चौधरी ब्लॉक प्रमुख गजरौला।
विधानसभा में क्षेत्र के गांवों में जरूरत के मुताबिक इंटर कॉलेज की स्थापना कराई जाएगी। इस बाबत जल्द ही शिक्षा विभाग के अफसरों से मिलेंगे। महेेंद्र सिंह खड़गवंशी, विधायक हसनपुर।