सावन में भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए लाखों कांवड़िए नंगे पैर कांवड़ कंधे पर रखकर सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा करते है। कांवड़ यात्रा में भक्तों की श्रद्धा की परीक्षा होती है। चमड़े से बने सामान, वस्त्रों को छूना, धारण करना मना है। यात्रा में बोल बम-बम-बम और हर हर महादेव के जयघोष लगाए जाते हैं। श्रवण कुमार ने अपने अंधे माता-पिता को कांवड़ में उठाकर पैदल ही सावन के महीने में यह यात्रा की थी। इसलिए पैदल कांवड़ यात्रा करने से पुण्य मिलता है। इस बार सावन माह की कांवड़ यात्रा चार जुलाई से शुरू हो रही है। बरेली, मुरादाबाद मंडल के अलावा बुलंदशहर समेत कई जनपदों के शिवभक्तों के लिए गढ़ मुक्तेश्वर का ब्रजघाट कांवड़ में जल लेने के लिए प्रमुख स्थान है। इन क्षेत्रों के कांवड़िए ब्रजघाट से गंगाजल लेकर प्रत्येक सोमवार को भगवान भोले शंकर का जलाभिषेक करते हैं। इतना ही नहीं हजारों शिव भक्त हरिद्वार, ऋषिकेश, गोमुख जैसे प्रसिद्ध स्थानों से भी गंगाजल लेकर लौटते हैं। ऐसे में सावन माह की कांवड़ यात्रा अमरोहा जनपद के लिए महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण रहती है।
कब से शुरू हो रहा है सावन
इस बार सावन का महीना करीब दो महीने का होने वाला है। सावन महीने की शुरुआत चार जुलाई से हो रही है। 31 अगस्त को इसका समापन होगा। वहीं सावन की शिवरात्रि 15 जुलाई को है।
क्यों बन रहा अद्भुत संयोग
पंडित आशुतोष त्रिवेदी ने बताया कि वैदिक पंचांग की गणना सौर मास और चंद्र मास के आधार पर की जाती है। चंद्र मास 354 दिनों का होता है। वहीं सौर मास 365 दिन का। दोनों में करीब 11 दिन का अंतर आता है और तीसरे साल ये अंतर 33 दिन का हो जाता है, जिसे अधिक मास कहा जाता है। ऐसे में इस बार सावन दो महीने तक रहने वाला है। हिंदू धर्म में भगवान भोलेनाथ की पूजा करने के लिए सावन के महीने को सबसे उत्तम माना जाता है। इस पूरे माह में शिव जी की विधि-विधान से पूजा की जाती है।
सावन सोमवार की तिथियां
पहला सोमवार 10 जुलाई
दूसरा सोमवार 17 जुलाई
तीसरा सोमवार 24 जुलाई
चौथा सोमवार 31 जुलाई
पांचवा सोमवार 7 अगस्त
छठा सोमवार 14 अगस्त
सातवां सोमवार 21 अगस्त
आठवां सोमवार 28 अगस्त
- कावंड़ियों के लिए सबसे जरूरी ये है कि पूरी यात्रा के दौरान कांवड़ को जमीन पर नहीं रखना होता है। यदि कावड़िए यात्रा के दौरान थक भी जाएं तो कांवड़ को टांग कर रख दिया जाता है। यात्रा में किसी भी तरह से मांस-मदिरा का सेवन पूर्णत: वर्जित होता है।
- आशुतोष त्रिवेदी, पंडित श्रीबाबा गंगानाथ मंदिर
- इस बार दो महीने कांवड़ यात्रा चलेगी। इसलिए जो रूट डायवर्जन प्लान चार हफ्तों के लिए रहता था अब आठ हफ्तों के लिए हो जाएगा। इस संबंध में अधीनस्थों के साथ बैठक की जा रही है। रेंज और जॉन स्तर पर भी बैठक हो चुकी हैं। कांवड़ियों की सुरक्षा में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाएगी। हाईवे पर लगने वाले जाम को लेकर भी विशेष सतर्कता बरती जाएगी। -आदित्य लांग्हे,
एसपी, अमरोहा