गजरौला। कार्तिक पूर्णिमा पर तिगरी गंगा मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के स्नान के लिए इस बार 12 स्नान घाट बनाए जाएंगे। जिसका जिम्मा बाढ़ खंड विभाग को मिला है, जबकि पूर्व में स्नान घाट लोक निर्माण विभाग द्वारा बनाए जाते थे। बाढ़ खंड यह देखने में लग गया है कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए स्नान घाट कहां पर उपयुक्त रहेंगे।
कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाले तिगरी गंगा मेले में इस बार 20 से 25 लाख श्रद्धालुओं के स्नान करने की संभावना है। श्रद्धालुओं को स्नान करने के लिए परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए इस बार दो स्नान घाट अधिक बनाए जाने का निर्णय लिया गया है, जबकि बीते साल लगे मेले में दस स्नान घाट बनाए गए थे। जो श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए कम पड़ गए थे। श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए डीएम राजेश कुमार त्यागी ने 12 स्नान घाट बनाए जाने के निर्देश दिए हैं। स्नान घाट बाढ़ खंड विभाग द्वारा बनाए जाएंगे। जबकि पूर्व के सालों में लोक निर्माण विभाग स्नान घाट बनाता था।
बाढ़ खंड के जेई सुभाष चंद गहलौत का कहना है कि यह देखा जा रहा है कि कहां पर स्नान घाट उपयुक्त रहेंगे। मेले का नक्शा मिलते ही स्नान घाट बनाने का काम शुरु कर दिया जाएगा। जिससे श्रद्धालुओं को स्नान के दौरान परेशानी का सामना न करना पड़े।
दस जिलों से अधिक के श्रद्धालु लगाते हैं गंगा में डुबकी
अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, संभल, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, बिजनौर जिलों के श्रद्धालु कार्तिक पूर्णिमा पर पतित पावनी गंगा में डुबकी लगाने आते हैं। कई दिन पहले मेले में अपने तंबू और डेरे लगा लेते हैं। चार किमी के दायरे में तंबुओं का शहर बस जाता है। पुण्य कमाने के लिए आने वाले श्रद्धालु आधी रात के बाद से ही पतित पावनी में डुबकी लगाने लगते हैं। श्रद्धालुओं द्वारा गंगा तट पर धार्मिक अनुष्ठान कराया जाता है। कोई बच्चों का मुंडन संस्कार कराता है तो किसी के द्वारा अन्य कार्य कराए जाते हैं।
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