मोहल्ला हक्कानी स्थित इमामबाड़े में सजी महफिल की शुरुआत शनिवार रात कारी फरमान जाफरी ने कुरान से की, जबकि नात-ए-पाक का नजराना डाॅ. जमशेद कमाल ने पेश किया। प्रोफेसर नाशिर नकवी ने पढ़ा, जुल्मते कहती हुईं भागी मोहम्मद आ गए, सिलसिले नामों नस्ब के सब बिखरकर रह गए।
ताजदार अमरोहवी ने ऐसे पढ़ा, जब भी लबों की रहल पर नादे अली रखी, मुझको किसी भी राह में खतरा नहीं हुआ। डॉ. जमशेद कमाल ने पढ़ा, नबी के चाहने वालों की ये भी खूबी है, सिया नज्फ में उजाले सहर के देखते हैं। महफिल में इनके अलावा मारूफ सिरसिवी, शबरोज कानपुरी, आसिम अमरोहवी, अशरफ फराज, गुफरान राहिल आदि शायरों ने अपने कलाम पेश किए। मुशायरे की अध्यक्षता मौलाना डॉ. शहवार हुसैन व संचालन प्रोफेसर नाशिर नकवी ने किया। अंजुमन के अध्यक्ष मोहम्मद जफर नकवी ने सभी का आभार जताया। इस दौरान इमाम जुमा वल जमात मौलाना डाॅ. सियादत नकवी, मौलाना सफदर रजा इमामी, तनवीर हैदर, ताजदार हुसैन, डाॅ. सईद उल हसन मौजूद रहे।