जिला अस्पताल में डायलिसिस यूनिट तो है, लेकिन यहां पर अभी तक नेफ्रोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं हो सकी है। इसके चलते अस्पताल की डायलिसिस यूनिट सिर्फ फिजिशियन के सहारे चल रही है। ऐसे में अस्पताल पहुंचने वाले किडनी से संबंधित मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रुटीन चेकअप के लिए मरीजों को निजी अस्पताल में जाना पड़ता है।
गर्मी के मौसम में डीहाइड्रेशन, इंफेक्शन और दूसरी वजहों से गुर्दे के मरीजों की तादाद बढ़ रही है। जिला अस्पताल के डायलिसिस सेंटर की दस मशीनों से तीन शिफ्टों में सुबह सात से रात को नौ बजे तक रोजाना करीब 30 किडनी के मरीजों की डायलिसिस की जा रही है। इसके बाद भी मरीजों की तादाद बढ़ती जा रही है। हालात ऐसे हैं कि सेंटर पर डायलिसिस कराने के लिए कई मरीज वेटिंग में हैं। पिछले दिनों अस्पताल को शासन से तीन और डायलिसिस मशीनें मिली हैं। इसके साथ ही अस्पताल के डायलिसिस सेंटर में मशीनों की संख्या बढ़कर 13 चल रही है।
अस्पताल के डायलिसिस सेंटर में इलाज की उम्मीद लगाए बैठे प्रतीक्षा सूची में शामिल गरीब तबके के मरीजों को उम्मीद थी कि मुरादाबाद, मेरठ, दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद के निजी अस्पतालों में इलाज पर पैसा नहीं बहाना पड़ेगा। मरीजों का डायलिसिस नेफ्रोलॉजिस्ट की सलाह से ही होता है। इससे गैर जनपद के मरीज तो अपने जिले में नेफ्रोलॉजिस्ट को दिखा लेते हैं। अमरोहा जिले के मरीजों को मुरादाबाद, मेरठ और दिल्ली या नोएडा में दिखाने जाना होता है।
- जिले में नेफ्रोलॉजिस्ट का पद सृजित नहीं है। इसलिए अब तक कोई तैनाती नहीं हो सकी है। पद सृजित होने पर विभाग की ओर से पत्राचार किया जाएगा। छोटी जगह पर नेफ्रोलॉजिस्ट डॉक्टर की तैनाती नहीं होती है। डायलिसिस यूनिट में मरीजों को देखभाल के लिए फिजिशियन डॉ. प्रांजल मिश्रा को नोडल मना रखा है। - डॉ. एसपी सिंह, सीएमओ