अमरोहा। जिले में नेत्र रोग विशेषज्ञों की कमी के कारण आंखों के मरीजों को उपचार के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अधिकांश सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) पर नेत्र रोग विशेषज्ञ तैनात नहीं हैं। ऐसे में मरीजों को जिला अस्पताल या निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। जिला अस्पताल में भी केवल एक नेत्र रोग विशेषज्ञ के भरोसे व्यवस्था चल रही है।
जिला अस्पताल में प्रतिदिन 80 से 100 मरीज आंखों के इलाज के लिए पहुंचते हैं। यहां नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. मनीष तिवारी अकेले ही ओपीडी संभाल रहे हैं। पहले अस्पताल में दो नेत्र रोग विशेषज्ञ तैनात थे, लेकिन एक चिकित्सक के बरेली तबादले के बाद रिक्त पद पर अब तक नियुक्ति नहीं हो सकी है। इसका सीधा असर मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है।
शुक्रवार को जिला अस्पताल में हसनपुर निवासी सुरेंद्र सिंह, जोया निवासी जितेंद्र सिंह और बबीता सहित कई मरीज जांच और उपचार के लिए पहुंचे। मरीजों का कहना है कि उनके क्षेत्र के सरकारी अस्पतालों में नेत्र रोग विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए उन्हें जिला अस्पताल आना पड़ता है। इससे समय और धन दोनों की अतिरिक्त लागत उठानी पड़ती है।
सीएचसी अमरोहा में भी नेत्र रोग विशेषज्ञ का पद रिक्त है। यहां केवल ऑप्टोमेट्रिस्ट (नेत्र परीक्षण अधिकारी) सामान्य जांच और दृष्टि परीक्षण करते हैं। जबकि मोतियाबिंद का ऑपरेशन, ग्लूकोमा, रेटिना संबंधी रोगों तथा अन्य गंभीर नेत्र समस्याओं का उपचार केवल नेत्र रोग विशेषज्ञ ही कर सकते हैं।
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जोया में दो साल से खाली है पद
जोया सीएचसी में पिछले दो वर्षों से नेत्र रोग विशेषज्ञ का पद रिक्त है। मरीजों का कहना है कि डॉक्टर नहीं होने के कारण उन्हें या तो जिला अस्पताल जाना पड़ता है या फिर निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराना पड़ता है।
धनौरा में भी विशेषज्ञ का इंतजार
मंडी धनौरा सीएचसी में भी लंबे समय से नेत्र रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हुई है। अस्पताल पहले से ही चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है। यहां अधीक्षक समेत केवल तीन चिकित्सक कार्यरत हैं और एक भी विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध नहीं है। ऐसे में आंखों के मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है।
हसनपुर, रहरा और ढबारसी में भी नहीं सुविधा
हसनपुर, रहरा और ढबारसी सीएचसी में भी नेत्र रोग विशेषज्ञ का अभाव बना हुआ है। स्थानीय लोगों के अनुसार करीब तीन वर्ष पहले हसनपुर सीएचसी में नेत्र चिकित्सक की तैनाती थी, लेकिन उनके तबादले के बाद नया डॉक्टर नहीं भेजा गया। बरसात के मौसम में आंखों में एलर्जी और संक्रमण के मरीजों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं होने से मरीजों को अमरोहा, मुरादाबाद और मेरठ तक जाना पड़ रहा है।
गजरौला में तीन दिन ही मिलती है सुविधा
गजरौला सीएचसी में नेत्र रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। यहां केवल नेत्र परीक्षण अधिकारी तैनात हैं, जो सप्ताह में तीन दिन ही सीएचसी में बैठते हैं। बाकी तीन दिन वे जिला अस्पताल में सेवाएं देते हैं। ऐसे में जिन दिनों वे सीएचसी में नहीं रहते, उन दिनों मरीजों को बिना इलाज लौटना पड़ता है।
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जिले में एक ही एसीएमओ
अमरोहा। जनपद में अपर मुख्य चिकित्साधिकारी (एसीएमओ) के कितने आठ पद हैं लेकिन फिलहाल एक ही एसीएमओ की तैनाती है।पद खाली होने से स्वास्थ्य विभाग के कामकाज पर दबाब बढ़ा है। एसीएमओ के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं, जिससे प्रशासनिक और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कार्य प्रभावित हो रहे हैं। जिम्मेदारियां डिप्टी सीएमओ के भरोसे निभाई जा रही हैं। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी और नगर स्वास्थ्य अधिकारी जैसे महत्वपूर्ण पद भी एसीएमओ स्तर के हैं, जिससे कार्यों का अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है। क्षय रोग और और टीकाकरण के संचालन के लिए इन पदों का सृजन किया जाता है।
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नेत्र रोग विशेषज्ञों के संबंध में शासन को अवगत कराया जा चुका है। पत्र भेजकर मांग भी की जा चुकी है। इसके अलावा दूसरे चिकित्सकों की भी डिमांड की गई है। एसीएमओ के बारे में भी शासन से पत्राचार किया गया है। -डॉ. रमाकांत सागर, सीएमओ