फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Amroha News: शिक्षक ने ऐसी दी सलाह कि मिल गई भविष्य की सटीक राह

Fri, 05 Sep 2025 02:49 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
विज्ञापन
विज्ञापन
अमरोहा। भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोपरि है। शिक्षक केवल किताबों का ज्ञान नहीं देते बल्कि वह जीवन जीने की कला, नैतिकता और अनुशासन का मार्ग भी दिखाते हैं। शिक्षक ही वह दीपक हैं जो अज्ञान के अंधकार को मिटाते हैं। हर सफल व्यक्ति के लिए गुरु की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
विज्ञापन

शिक्षक अपने विद्यार्थियों को न केवल शिक्षित करता है बल्कि मानसिक रूप से मजबूत भी बनाता है। शिक्षा को एक गुरु के माध्यम से ही प्राप्त किया जा सकता है। छात्र एक ढीली मिट्टी के समान होते हैं गुरु ही उनको एक सही आकार और सांचे में ढालकर समाज में अपना योगदान देता है। शिक्षक ही हमें सही और गलत के बीच का अंतर सिखाते हैं जो हमें जीवन में सही रास्ते पर चलने में मदद करता है। वह हमें भविष्य के लिए तैयार करते हैं जिससे हम अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं। हमें अपने जीवन को सुधारने में मदद करते हैं, और हमें एक अच्छा इंसान बनाते हैं। अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की और ले जाने में एक शिक्षक का अहम योगदान होता है। अमर उजाला से पाठकों ने अपने गुरुओं के संस्मरणों को साझा किया।
माता-पिता सबसे बड़े शिक्षक : डीएम
डीएम निधि गुप्ता वत्स ने कहा कि जीवन की शुरुआत में माता-पिता ही सबसे पहले गुरु होते हैं। चलने से लेकर वह बच्चों को शिष्टाचार, नैतिकता, और जीवन के मूल्यों के बारे में सिखाते हैं। जीवन के हर मोड़ पर वह अपने अनुभवों से बच्चों को जीवन जीने की कला को सिखाते हैं। हर मुसीबत में माता-पिता ही ढाल बनकर खड़े होते हैं। केवल माता-पिता अपने बच्चों को अपने से ज्यादा सफल देखना चाहते हैं। अभिभावकों द्वारा दिए गए संस्कार ही आपको समाज में महत्वपूर्ण स्थान दिलाते हैं। यह शिक्षक दिवस मेरे पहले गुरु माता-पिता को समर्पित है।
विज्ञापन

-
शिक्षक की प्रेरणा से बदली जीवन की राह : सीडीओ
सीडीओ अश्वनी कुमार मिश्रा ने कहा कि यूं तो शुरुआती दौर में माता पिता ही शिक्षक की भूमिका निभाते है। लेकिन पढ़ाई के दौरान कुछ शिक्षक ऐसे भी मिलते हैं, जिनकी प्रेरणा से जीवन के मायने ही बदल जाते हैं। ऐसा ही कुछ मेरे साथ भी हुआ। शिक्षक डॉ. जयनारायण पांडेय का मेरे जीवन में बड़ा योगदान रहा है। उनके सानिध्य में रहने के बाद ही सिविल सेवा में आकर जनसेवा का मौका मिला। उनके सानिध्य में सात छात्रों में छह छात्रों ने सरकारी नौकरी पाई थी, जबकि एक शिक्षक बने। उनकी ही प्रेरणा से वह नौकरी को जनसेवा के रूप में करते हैं।


श्रेष्ठ शिक्षक ही वंदनीय और पूजनीय : सुमेधा
श्रीमद दयानंद कन्या गुरुकुल महाविद्यालय चोटीपुरा की प्रचार्या आचार्य सुमेधा ने कहा कि शिक्षक को वेदों में आचार्य की संज्ञा दी गई है। आचार्य अर्थात आचारं ग्राहयति यानी जो बालक को सदाचार सिखाते हुए जीवन को जीने की कला सिखाए और बुद्धि का विकास करे। वही शिक्षक है। माता-पिता बच्चे को केवल शरीर से जन्म देतें हैं लेकिन शिक्षक बच्चों को ज्ञान से दूसरा जन्म प्रदान करता है। वहीं उसका श्रेष्ठ जन्म होता है। मैं आज भी पीएचडी के दौरान गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय हरिद्वार के कुलपति रहे डॉ. रामनाथ वेदालंकार की प्रेरणा व उनके आदर्शों का अनुकरण कर रहीं हूं। उनकी दी हुई सीख और ज्ञान मुझे आज भी जनसेवा और समाजसेवा की प्रेरणा देता है।


शिक्षक की कही बात बन गई जीवन की सीख : प्रधानाध्यापक
प्राथमिक विद्यालय बसेड़ा खुर्द के प्रधानाध्यापक भूपेंद्र सिंह ने कहा कि बीकॉम के दिनों के शिक्षक राजेश कुमार से ट्यूशन लिया करता था। वह जरूरतमंद परिवारों के बच्चों को विशेष ध्यान रखते थे तथा उनकी हर संभव मदद भी किया करते थे। एक बार जब मैंने उन्हें ट्यूशन फीस दी, तो सबके सामने तो उन्होंने स्वीकार कर ली, पर बाद में लौटाते हुए कहा ‘बेटा, तुम्हारे पिताजी के देहांत के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति चुनौतीपूर्ण हो गई है। यह पैसे तुम अपने घर पर खर्च करो। मेरी असली गुरु दक्षिणा यही होगी कि तुम बीकॉम में टॉप करो, सफल बनो और आगे चलकर दूसरों की मदद करो। उनकी बातें मेरे लिए जीवन की सीख बन गईं। वे हमेशा कहते थे हर चमकती चीज सोना नहीं होती, सोना बनने के लिए सोने जैसे गुण अपनाने पड़ते हैं। उनसे मैंने सच्ची इंसानियत और मदद का महत्व सीखा। आज मैं उनकी दी गई सीख का अनुसरण करता हूं।
-

मेरी प्रारंभिक शिक्षा जनपद अमरोहा के हसनपुर ब्लॉक के प्राइमरी पाठशाला अंबरपुर में वर्ष 1987 से 1991 तक हुई थी। मेरे शिक्षक रामशरण सिंह जी ने मुझे कक्षा 1 से 5 तक अच्छी शिक्षा प्रदान की और पढ़ाई के साथ-साथ नैतिक शिक्षा पर भी विशेष जोर दिया। मेरे सफल जीवन में गुरु जी का बहुत योगदान है। मैं भाग्यशाली हूं मुझे रामशरण सिंह जी जैसे शिक्षक मिले। उन्होंने केवल मुझे मेरे लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रेरित ही नहीं किया बल्कि हमें पढ़ाई के लिए हमेशा हर कदम पर समर्थन भी किया। वह हमेशा उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रेरित करते रहते थे और अच्छे-अच्छे उदाहरण देते थे। गुरु जी अनुशासन के प्रति बहुत ही सख्त थे और लापरवाही पर दंडित भी किया करते थे। आज मैं जो कुछ भी हूं, गुरुजनों द्वारा दी गई शिक्षा की बदौलत ही हूं।- रामवीर सिंह, प्रधानाध्यापक प्राथमिक विद्यालय गुलामपुर/ ब्लॉक अध्यक्ष, उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ब्लॉक गंगेश्वरी
-

शिक्षकों ने सुझाई सही राह
शिक्षकों का सहयोग और मार्गदर्शन जीवन में बड़े बदलाव जाता है। माता-पिता पहले शिक्षक होते हैं लेकिन जीवन में सफलता का मंत्र गुरु ही देते हैं। मेरे जीवन में भी गुरुओं का बड़ा महत्व रहा है। सिस्टर राम्या जैकब, प्रभात त्यागी व जनित त्यागी की सीख ने मुझे सफलता के मुकाम तक पहुंचाया और पीसीएस-जे में सफलता मिली। आज का यह दिन उन्हीं के लिए समर्पित है। - अक्षी गिल, सिविल जज, जूनियर डिवीजन, निवासी मल्हुपुरा, धनौरा


दादी ने दी सीख और बदल गया जीवन
बात 1998 की है मैं हाईस्कूल की परीक्षा में बमुश्किल द्वितीय श्रेणी से विद ग्रेस पास हुआ, तब मेरे पिताजी ने मुझे अच्छे से पढ़ने के लिए रुद्रपुर मेरे ताऊ जी की यहां भेजा। रुद्रपुर जाते समय मेरी दादी जी जो कि स्वयं एक शिक्षिका थी मेरी गुरु भी बन गईं और उन्होंने मेरा मनोबल बढ़ाया और कहा करत करत अभ्यास से जड़ मत होत सुजान बेटा मेरी इस बात को सदैव याद रखना फिर तुझे एक दिन सरकारी सेवा में भी जाना है। बस मेहनत करना मत छोड़ना। यहां से मेरी बेहतर पढ़ाई की शुरुआत हुई, मैं इंटरमीडिएट की परीक्षा में फर्स्ट डिवीजन से उत्तीर्ण हुआ। कॅरिअर में सफलता न मिलने के बाद भी दादी ने ही मेरा हौंसला बढ़ाया।- अभिषेक त्रिवेदी, शिक्षक
विज्ञापन

-
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें