अमरोहा। ट्रक चोरी के बाद बीमा कंपनी को सूचना देने में सात दिन की देरी को आधार बनाकर दावा खारिज करना कंपनी को भारी पड़ गया। उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी का फैसला गलत ठहराते हुए पीड़ित तस्लीम के पक्ष में फैसला सुनाया। आयोग ने 14.73 लाख रुपये नौ प्रतिशत ब्याज समेत देने के साथ मानसिक एवं आर्थिक क्षति के लिए 15 लाख और वाद व्यय के रूप में 10 हजार रुपये देने के आदेश दिए।
मामला अमरोहा नगर निवासी तस्लीम के ट्रक चोरी से जुड़ा है। ट्रक की बीमा पॉलिसी 19 मई 2019 से 18 मई 2020 तक वैध थी और वाहन की घोषित कीमत 14.73 लाख रुपये थी। तस्लीम के मुताबिक 30 नवंबर 2019 की रात ट्रक जोया में खड़ा था। सुबह ट्रक गायब मिला। उसने पुलिस को सूचना देने का प्रयास किया, लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। बाद में 10 दिसंबर को डिडौली थाने में चोरी की रिपोर्ट दर्ज हुई। बीमा कंपनी को छह दिसंबर को सूचना देकर क्लेम दर्ज कराया गया। वाहन बरामद न होने पर पुलिस ने अंतिम रिपोर्ट दाखिल की, जिसे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अमरोहा ने 10 फरवरी 2021 को स्वीकार कर लिया। इसके बाद बीमा कंपनी ने दावा निरस्त कर दिया।
तस्लीम ने आरटीआई के तहत पुलिस कंट्रोल रूम से जानकारी मांगी। 11 मई 2023 को मिली सूचना में सामने आया कि एक दिसंबर 2019 को सुबह 10:56:11 बजे यूपी-112 पर ट्रक चोरी की सूचना दी गई थी। आयोग ने इसे महत्वपूर्ण साक्ष्य मानते हुए कहा कि पीड़ित ने पुलिस को समय से सूचना दी थी। एफआईआर दर्ज होने में हुई देरी के लिए शिकायतकर्ता को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
आयोग ने कहा कि पुलिस को समय पर सूचना दिए जाने के बावजूद केवल बीमा कंपनी को सूचना देने में देरी के आधार पर वास्तविक चोरी का दावा खारिज नहीं किया जा सकता। वाहन पर बैंक या फाइनेंसर का ऋण बकाया होने पर अवार्ड की धनराशि पर पहला अधिकार संबंधित बैंक या फाइनेंसर का होगा। शेष राशि शिकायतकर्ता को दी जाएगी।